उत्तर प्रदेश के गो तस्कर उत्तराखंड के पहाड़ों में सक्रिय हैं। पहाड़ों से गायों की तस्करी या तो पैदल मार्ग से या फिर वाहनों के जरिए की जा रही है। अब तक जितने भी मामले सामने आए हैं उनमें पहाड़ के करीब सभी हिस्सों से गोवंश लाने के हैं।
इन मामलों में अब तक पकड़े गए सभी आरोपी उत्तर प्रदेश के ही हैं। इन पशुओं को ले जाने का तरीका भी एक जैसा ही रहता है। इसी साल गौवंश तस्करी के चार मामले सामने आ चुके हैं।
गांव-गांव इकठ्ठा करते हैं जानवर
पहाड़ी क्षेत्रों में लोग जिन जानवरों को पालना नहीं चाहते हैं उनको वे या तो मुफ्त में या फिर ओने-पौने दामों में इन लोगों को बेच देते हैं। जगह-जगह गावों में घूम-घूमकर ये तस्कर गोवंश के पशु इकट्ठा करके उसे ट्रक या फिर जंगल के रास्ते पैदल ले जाते हैं।
कोटद्वार शहर से ही यूपी की सीमा शुरू हो जाती है, कोटद्वार को पार करने के बाद किसी भी तस्कर को पकड़ना संभव नहीं हो सकता। चेकपोस्टों पर भी निर्धारित चेकिंग नहीं होती है। आसानी से ये तस्कर गायों को लेकर निकल जाते हैं।
इन रास्तों निकलते हैं तस्कर
सतपुली से बांघाट क्षेत्र से द्वाराखाल, कांडाखाल होते हुए पौखाल, सौड़, मालन नदी होते हुए गो तस्कर बिजनौर क्षेत्र की सीमा में घुस जाते हैं। रिखणीखाल के कुछ क्षेत्रों से खरका बैंड, ढौंडियाल से खंसूर के डांडापानी के रास्ते से चौखम होते हुए ठंडी पालपुर के रास्ते बढ़ापुर बिजनौर क्षेत्र में प्रवेश करते हैं। स्यूंसी बैजरो, धुमाकोट, शंकरपुर के रास्ते रामनगर का मार्ग तस्करों के लिए काफी बेहतर साबित होता है। वाहनों से दुगड्डा और कोटद्वार में ही पकड़े जाने की ज्यादा संभावना होती है। ट्रक की यदि चेकिंग हो गई तो पकड़ा जाता है वरना ट्रक आसानी से सीमा पार कर जाता है।
इस साल के खास मामले
27 सितंबर को 2013 को कौड़िया में स्थानीय लोगों ने एक यूटीलिटी में 15 गोवंश पकड़े। इस मामले में एक आरोपी धरा गया। एक फरवरी 2013 को रिखणीखाल के ढाबखाल में पुलिस ने दो ट्रकों में 35 गोवंश पकड़े, जिसमें तीन की मौत हो गई थी। 19 मार्च 2013 को एक ट्रक में 15 गोवंश ले जाते पुलिस ने यूपी सीमा बगनाला में पकड़ा जिसमें एक गिरफ्तार किया गया। एक जनवरी 2013 को भी 18 गौवंशों से भरा ट्रक पकड़ा गया था। आठ अगस्त 2012 को सनेह में एक ट्रक में 22 गोवंशों को ठूंसा गया था। सनेह चौकी के पास पुलिस ने इसे पकड़ा था।
लोगों का लगा रहा जमघट
शुक्रवार को पकड़े गए गाय, बैलों को देखने के लिए कोतवाली में लोगों का जमघट लगा रहा। कुछ लोग तो गोवंशों को ट्रक से बाहर निकालने, उनको चारा पानी देने में लगे रहे। तमाशबीन भी मौके पर मौजूद रहे।
पुलिस की सक्रियता से मिली सफलता
पुलिस की सक्रियता का ही नतीजा है कि कड़ाके की ठंड में भी सुबह साढ़े चार बजे चेकिंग कर गौवंश ले जाते ट्रक को पकड़ा गया। तस्कर सुबह ठंड का फायदा उठाकर निकलना चाहते थे, लेकिन उनकी मंशा को पुलिस ने पूरा नहीं होने दिया।
पकड़ने वालों में चौकी प्रभारी जितेंद्र सिंह चौहान, मुख्य आरक्षी नौशाद अंसारी, आरक्षी संदीप मैंदोला, शैलेंद्र नौटियाल, खेमसिंह बिष्ट, कमल और मोहित कुमार थे।