पौड़ी के नगर पालिका अध्यक्ष यशपाल बेनाम, सरिता नेगी और अशोक बिष्ट को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे) से राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को एडीजे कोर्ट ने उनका जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया। बृहस्पतिवार को जिला एवं सत्र न्यायालय पौड़ी ने उनका जमानता प्रार्थनापत्र सुनवाई के लिए कोटद्वार एडीजे कोर्ट में ट्रांसफर किया था।
शासकीय अधिवक्ता नसीम बेग ने बताया कि शुक्रवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सहदेव सिंह की अदालत में पूर्व पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम, सरिता नेगी और अशोक बिष्ट की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने उनकी जमानत का पुरजोर विरोध किया।
कहा कि तीनों लोगों द्वारा एक राजकीय कर्मचारी के कार्य निष्पादन में बाधा उत्पन्न की गई है, यही नहीं उन्हें उच्चाधिकारियों के सम्मुख धमकी भी दी गई है। जिससे सरकारी कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हुआ है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि तीनों आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी रहा है।
पत्रावलियों पर उपलब्ध तथ्यों के अनुसार प्रस्तुत केस में विवेचना पूर्ण कर आरोपत्र प्रस्तुत किया जा चुका है। इस घटनाक्रम की वीडियोग्राफी की सीडी भी विवेचना अधिकारी को उपलब्ध कराई गई है। बचाव पक्ष ने उनकी जमानत के पक्ष में दलीलें दी। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि तीनों आरोपी निर्दोष हैं।
उन्हें इस केस में फंसाया गया है। तीन दिन विलंब से यह केस दर्ज कराया गया है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करने योग्य पाया।