असली उत्पाद बेचने वालों की आर्थिकी होगी मजबूत
पश्मीना के शॉल देशभर में प्रसिद्ध हैं। लैब इंचार्ज डॉ. संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि इसमें मिलावट के उत्पाद भी बाजारों में बिक रहे हैं। इससे पश्मीना के उत्पाद बनाने वाले और पश्मीना बकरी पालकों को नुकसान होता है। साथ ही जो उत्पाद विदेशों में भेजे जाते हैं यदि उनमें मिलावट होती है तो इससे भारत की छवि भी खराब होती है। एक भी उत्पाद में मिलावट मिलने पर बंदरगाहों और एयरपोर्ट पर सारा माल रोक दिया जाता है। ऐसे में अब पश्मीना के उत्पादों की संस्थान में स्थापित लैब में जांच की जाएगी। शुद्ध उत्पाद को एक विशेष कोड दिया जाएगा। कश्मीर में बने सभी उत्पादों की यहां जांच की जाएगी। इससे असली उत्पाद बेचने वालों की आर्थिकी मजबूत होगी और लोगों को शुद्ध उत्पाद मिल सकेंगे।
तिब्बत के चीरू जानवर का भी होगा संरक्षण
दरअसल, पश्मीना की आड़ में चीरू की ऊन से उत्पाद बनाए जाते हैं। इसके लिए इस जानवर का शिकार किया जाता है। यह जानवर तिब्बत के पठारों पर पाया जाता है। इसकी गुणवत्ता पश्मीना से भी अच्छी होती है, लेकिन यह प्रतिबंधित जानवर है। विदेशों में भी इसके उत्पादों पर प्रतिबंध है। ऐसे में जब प्रमाणन की व्यवस्था शुरू हो जाएगी तो इसमें भेद हो सकेगा कि यह चीरू की ऊन से बना है या फिर पश्मीना की। इससे जब देश में ही चीरू की ऊन से बने उत्पाद पकड़े जाएंगे तो इस जानवर का भी संरक्षण हो सकेगा।
ऑनलाइन पोर्टल से बचेगी रेलवे ट्रैक पर हाथियों की जान
भारतीय वन्य जीव संस्थान की ओर से भारतीय रेल के लिए पहला विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया है। इस पोर्टल के माध्यम से हाथियों की लोकेशन की निगरानी की जाएगी। इससे लोको पायलट को ट्रैक के आसपास हाथियों के गुजरने की जानकारी मिल जाएगी। एहतियातन यहां ट्रेन को धीरे कर या रोककर हाथियों की जान बचाई जा सकेगी। इस पोर्टल की शुरुआत भी केंद्रीय मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान की।