अल्मोड़ा की सोमेश्वर तहसील के स्यूनराकोट गांव के प्राचीन नौले को राष्ट्रीय महत्व का प्राचीन स्मारक घोषित कर दिया है। इस नौले की अधिसूचना जारी करते हुए पिछले साल जुलाई में आपत्तियां मांगी गई थीं। कोई आपत्ति न आने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इस साल नौले को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करते हुए इसका संरक्षण शुरू कर दिया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण देहरादून मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद मनोज कुमार सक्सेना ने इसकी पुष्टि की।
कुमाऊं के गांव-गांव में नौले बनाने की परंपरा रही है। प्राचीन समय से ही यह पेयजल के मुख्य स्रोत रहे। माना जाता है कि बहुत से नौलों का निर्माण कत्यूर, चंद शासनकाल में किया गया था, जो आज भी ऐतिहासिक धरोहर के रूप में देखने को मिलते हैं। लोग आज भी उनसे शुद्ध पेयजल प्राप्त कर रहे हैं। स्यूनराकोट गांव में प्राचीन नौला कत्यूरी शासन काल का है। इसका निर्माण 14वीं सदी में किया गया था।
अंतिम अधिसूचना जारी हुई
लंबे समय से क्षेत्रवासी इस ऐतिहासिक नौले के संरक्षण की मांग कर रहे थे। उसके बाद पुरातत्व विभाग ने सर्वे किया था।सर्वे के बाद प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम 1958 की धारा-4 की उपधारा-1 के तहत इसे राष्ट्रीय महत्व का घोषित करने के लिए पिछले साल जुलाई में अधिसूचना जारी की गई थी, जिस पर दो माह में आपत्तियां मांगी गई थीं। अधीक्षण पुरातत्वविद मनोज सक्सेना ने बताया कि कोई भी आपत्ति नहीं आई। इसके बाद इस साल इसकी अंतिम अधिसूचना जारी हो गई। इसके साथ ही इसका संरक्षण अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के हवाले हो गया है।