कोई भी मामला सामने आने पर लाइजन अधिकारी को सीएमओ या स्वास्थ्य अधिकारियों की मदद से तय करना होगा कि यह हाई रिस्क मामला है या लो रिस्क। हाई रिस्क मामलों में 14 दिन का होम क्वारंटीन और कोविड टेस्ट जरूरी है। लो रिस्क वाले मामलों में कर्मी काम पर आ सकेंगे लेकिन उनके स्वास्थ्य की नियमित जांच की जाएगी। बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम, गले में खराश आदि से पीड़ित कर्मियों को काम करने की इजाजत नहीं होगी। इनको स्वास्थ्य की जांच कराने और घर पर ही रहने को कहा जाएगा।
कंटेनमेंट जोन वालों को नहीं होगी अनुमति
एसओपी में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि लाइजन अधिकारी यह तय करेंगे कि संस्थान के कौन-कौन कर्मचारी कंटेनमेंट जोन में रह रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से अग्रिम आदेश जारी न होने तक ये कर्मचारी काम पर नहीं आएंगे। ये घर से ही काम करेंगे।
हाई रिस्क कर्मियों के लिए अतिरिक्त सावधानी
किसी बीमारी से पीड़ित, वयोवृद्ध, गर्भवती महिलाएं आदि के प्रति अतिरिक्त सावधानी बरती जाएगी। इनको लोगों से संबंधित फ्रंटलाइन काम में नहीं लगाया जाएगा। प्रबंधन यह कोशिश करेगा कि इनको घर से काम करने की सुविधा मिले।
जिला प्रशासन के लिए यह है व्यवस्था
- जिलों में उद्योग, व्यवसायिक संस्थानों और निर्माण कंपनियों को अबाध रूप से चलने देने के लिए जिलाधिकारियों को अधिकार।
- जिलाधिकारी अपने स्तर से जिले के वरिष्ठ प्रशानिक अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाएंगे।
- जिले में सीएमओ को स्वास्थ्य नोडल अधिकारी।
- नगर निगम, नगर पंचायत और नगर पालिका में भी सहायक नोडल अधिकारी बनेंगे
- कार्यस्थल पर हमेशा मास्क पहन कर रखना होगा।
-कार्यस्थल को सही तरीके से सैनिटाइज करके रखना होगा।
- थर्मल स्क्रीनिंग होगी।
- बायोमीट्रिक हाजिरी नहीं होगी, कार्ड से हाजिरी की व्यवस्था की जा सकती है।
- आरोग्य सेतु एप का इस्तेमाल जरूरी।
- पविहन से संबंधित वाहनों को हर चक्कर से पहले संक्रमण मुक्त करना होगा।
- चालक, परिचालक आदि का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षाण होगा।
- चालकों और वाहनों का रजिस्टर बनाया जाएगा।
- एअर कंडीशन, वेंटीलेशन को लेकर राज्य सरकार के नियम मानने होंगे।
- कर्मियों को एक डेस्क से दूसरी डेस्क पर नहीं जाने दिया जाएगा। मोबाइल, इंटरकॉम आदि का प्रयोग नहीं किया जाएगा।
- परिसर में पान मसाला, गुटका, तंबाकू का सेवन पूरी तरह से प्रतिबंधित।
- दरवाजे जहां तक संभव हों खुले रखे जाएंगे।