प्रदेश के राजकीय व निजी अस्पतालों में रेपिड एंटीजन टेस्ट की सुविधा उपलब्ध कराने को कहा गया है। शत प्रतिशत बच्चों की कोविड जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। कहा गया है कि जिन निजी अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञ कार्यरत हैं, उन्हें 0 से 18 आयु वर्ग के बच्चों की कोविड निगरानी के लिए एंटीजन जांच के लिए अधिकृत किया जाए।
38.49 लाख बच्चों को देंगे विटामिन
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए प्रदेश में 0 से 18 आयु वर्ग के 38.49 लाख से अधिक बच्चों को विटामिन ए, सी, डी, जिंक की डोज दी जाएगी। एक साल से कम, 1 से 10 और 10 से 18 आयु वर्ग के हिसाब से विटामिन की डोज निर्धारित की गई है।
0 से 18 आयु वर्ग की संख्या
जिला संख्या
अल्मोड़ा 272650
बागेश्वर 114982
चमोली 171671
चंपावत 122584
देहरादून 394310
हरिद्वार 707930
नैनीताल 305404
पौड़ी 405955
पिथौरागढ़ 207343
रुद्रप्रयाग 108613
टिहरी 206975
ऊधमसिंह नगर 596180
उत्तरकाशी 155338
देशभर के चिकित्सा विशेषज्ञ जहां कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर आशंका जता रहे हैं और तीसरी लहर से निपटने को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के साथ ही शासन, प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं आशारोड़ी चेक पोस्ट पर दूसरे राज्यों से आने वाले यात्रियों की कोरोना जांच में लापरवाही बरती जा रही है। सूत्रों की मानें तो हजारों की संख्या में ऐसे यात्री हैं जो सिर्फ ई-पास दिखाकर ही बगैर कोरोना जांच कराए राजधानी में दाखिल हो रहे हैं। राजधानी में दाखिल होने वाले यात्रियों में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, नई दिल्ली समेत उन राज्यों के यात्री भी शामिल हैं, जहां अभी कोरोना का असर काफी है।
प्रावधानों के तहत दूसरे राज्यों के यात्रियों को 72 घंटे पहले की निगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट साथ लाना जरूरी है और अगर यह रिपोर्ट नहीं है तो ऐसे सभी यात्रियों को कोरोना जांच केंद्रों पर विधिवत एंटीजन टेस्ट कराना चाहिए।दिलचस्प पहलू यह है कि मजदूरों में तमाम ऐसे मजदूर हैं जो यूपी परिवहन निगम की बसों में बैठकर डाटकाली मंदिर तक आ रहे हैं। यूपी की बसों को उत्तराखंड की सीमा में दाखिल होने की अनुमति नहीं होने से बसों के चालक - परिचालक यात्रियों को डाटकाली मंदिर के पास ही उतार दे रहे हैं और यात्री वहीं से पैदल सामान के साथ राजधानी में दाखिल हो रहे हैं। इन मजदूरों में से ज्यादातर का कोरोना टेस्ट नहीं कराया जा रहा है जो गंभीर बात है।
वहीं रेलवे स्टेशन पर जीआरपी पुलिस और रेल प्रशासन की ओर से ऐसी व्यवस्था की गई है कि कोई भी यात्री बिना कोरोना जांच कराएं बाहर जा ही नहीं सकता है। निजी कंपनी की मदद से रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले सभी यात्रियों की कोरोना जांच के बाद ही उन्हें बाहर भेजा जा रहा है।
जांच केंद्र पर प्रतिदिन औसतन 800 यात्रियों का कोरोना टेस्ट किया जा रहा है। पुलिसकर्मियों द्वारा चेकपोस्ट पर रोककर जिन यात्रियों को जांच केंद्र भेजा जाता है ,उनका एंटीजन टेस्ट किया जा रहा है और जिन यात्रियों में कोरोना संक्रमण पाया जाता है। इसकी जानकारी तत्काल सम्मानित अधिकारियों को दी जाती है। साथ ही संक्रमित मरीज को कोविड सेंटर भेजा जा रहा है।
- डॉक्टर एक्यू अंसारी, नोडल अधिकारी