हरिद्वार में भी लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने की बात सामने आने पर राहत शिविरों, होटल, धर्मशालाओं एवं आश्रमों में फंसे सैकड़ों आमजन का सब्र जवाब देने लगा है। इन लोगों को अब राहत शिविर आफत लगने लगे हैं। वे या तो पुलिसकर्मियों से उलझ रहे हैं या फिर उन स्थानों के प्रबंधकों व कर्मचारियों से तू-तू मैं-मैं कर रहे हैं, जहां उन्हें ठहराया गया है।
धर्मनगरी में राहत शिविरों में मौजूदा समय में करीब 262 कामगार हैं। उनकी देखभाल में हरिद्वार पुलिस जुटी है। होटल, धर्मशाला में भी करीब साढ़े सात सौ यात्री फंसे हुए हैं। अब जब यह बात सामने आ रही है कि लॉकडाउन का समय बढ़ रहा है तो वे लोग झल्ला उठे हैं। वह आश्रम, होटल एवं धर्मशालाओं के प्रबंधकों व कर्मचारियों से उलझ रहे हैं।
उनका कहना है कि उन्हें रोकने का कोई औचित्य नहीं है। वे लोग न तो बीमार हैं न ही उन्हें कोई दूसरी दिक्कत है। अब उनके पैसे भी खत्म हो चुके हैं। अब उन्हें वापस लौटना है। उनका कहना है कि 14 अप्रैल के बाद उन्हें उनके घर वापस भेजने का इंतजाम सरकार को करना चाहिए।
कोतवाली प्रभारी प्रवीण सिंह कोश्यारी बताते हैं कि रोजाना विवाद सामने आ रहे हैं। पुलिस उनकी मनोदशा को समझकर दिलासा दिला रही है। उन्हें भेजने की बात उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई जा रही है।
राहत शिविर में रुके लोगों ने बाद में समझाने पर खाना ले लिया है। शिविर में रुके लोगों को सभी प्रकार की जरूरी व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। आज सुबह उनसे फिर बातचीत की जाएगी। इसके बाद भी वे घर जाने की जिद पकड़ते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-पूरण सिंह राणा, एसडीएम