दुनिया का पहला देश होगा जो कक्षा छह से इंटर तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता को पढ़ाएगा। अब तक आईआईटी स्तर पर इसे पढ़ाया जाता है। नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में भाषा और विषयों का कोई बंधन नहीं है। छात्र जो विषय चाहे ले सकते हैं। उन्हें लगता है कि जिस विषय के साथ वह महारथ हासिल कर सकते हैं उस विषय को लें। इसके अलावा जब चाहे उसे छोड़ सकते हैं। एक साल में पढ़ाई छोड़ने पर उन्हें सर्टिफिकेट, दो साल में डिप्लोमा और तीन साल में डिग्री मिलेगी। इसके बाद जहां से छोड़ा है फिर वहीं से शुरू कर सकते हैं।
अब विधि की पढ़ाई भारतीय भाषाओं में होगी
केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरिया निशंक शुक्रवार को सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचकर वर्चुअल रूप से महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह से जुड़े। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि अब विधि की पढ़ाई भी भारतीय भाषाओं में होगी। यह विश्वविद्यालय तक्षशिक्षा और नालंदा जैसे ज्ञान का वैश्विक केंद्र बनेगा। विश्वविद्यालय में विधि की पढ़ाई हिंदी माध्यम से शुरू होने जा रही है। भारतीय भाषाओं में अब अभियांत्रिकी, चिकित्सा और विधि की पढ़ाई संभव होगी।
केंद्रीय विद्यालयों के लिए भूमि की समस्या बताई
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय का निरीक्षण करने के साथ ही विभागीय अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय विद्यालय गौचर, हल्द्वानी, बनबसा, पौड़ी, कोटद्वार आदि में विद्यालयों के लिए सीबीएसई को जमीन नहीं मिल पा रही है। इस पर केंद्रीय मंत्री ने इसके लिए प्रयास किए जाने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन स्कूल के लिए जमीन नहीं मिलेगी तो इन स्कूलों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ सकता है।