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Corona in Uttarakhand: 13 जिलों के 132 अस्पतालों में 2720 स्वास्थ्यकर्मियों का टीकाकरण पूर्वाभ्यास रहा सफल

Fri, 08 Jan 2021 11:19 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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कोरोना टीका लगाने का पूर्वाभ्यास - फोटो : amar ujala
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उत्तराखंड के 13 जिलों में 132 अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में कोरोना टीकाकरण का अभ्यास सफल रहा है। पूर्वाभ्यास में टीकाकरण के लिए चयनित 3160 स्वास्थ्यकर्मियों में से 2720 को टीके लगाए गए। जिसमें 116 में वैक्सीन का प्रतिकूल प्रभाव रिकार्ड किया गया। इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या को देखते हुए तीन स्थानों पर टीकाकरण का ऑफलाइन ट्रायल किया गया। 

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Coronavirus in Uttarakhand : गुरुवार को मिले 249 नए संक्रमित, छह मरीजों की मौत

केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशानिर्देशों के अनुसार शुक्रवार को प्रदेश के 13 जिलों में पूर्वाभ्यास के दौरान 86 प्रतिशत कोरोना टीकाकरण किया गया। देहरादून और पौड़ी जिले में 11-11 और अन्य जिलों में 10-10 चिकित्सा इकाईयों में पूर्वाभ्यास के जरिये टीकाकरण की व्यवस्था का इम्तिहान लिया गया। जिसमें स्वास्थ्य विभाग को सफलता मिली है। 
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राज्य नोडल अधिकारी व एनएचएम मिशन निदेशक सोनिका ने बताया कि प्रदेश भर में 132 चिकित्सा इकाईयों में पूर्वाभ्यास के दौरान 2720 हेल्थ वर्करों का टीकाकरण किया गया। इसमें 116 को वैक्सीन लगाने के बाद प्रतिकूल प्रभाव भी रिकार्ड किया गया, ताकि कोरोना टीकाकरण के दौरान प्रतिकूल प्रभाव से निपटा जा सके। वहीं, इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या को देखते हुए तीन स्थानों पर ऑफलाइन टीकाकरण का ड्राई रन भी सफल रहा है। राज्य कोविड कंट्रोल रूम से चीफ ऑपरेटिंग आफिसर डॉ. अभिषेक त्रिपाठी के अगुवाई में प्रदेश भर में टीकाकरण पूर्वाभ्यास की निगरानी की गई। 

प्रदेश में तैनात होंगे 2118 वैक्सीनेटर और 402 पर्यवेक्षक 
एनएचएम निदेशक डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि सरकार की ओर से कोरोना वैक्सीन को लोगों को उपलब्ध कराने के लिए पूर्वाभ्यास किया जा रहा है। पहले चरण में 94 हजार हेल्थ वर्करों का डाटा तैयार किया गया है। जिसमें 2804 सरकारी और 2149 निजी अस्पतालों के कर्मचारी शामिल हैं। प्रदेश भर में 9708 स्थानों पर कोरोना टीकाकरण किया जाएगा। इसके लिए 2118 वैक्सीनेटर और 402 पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे। इसके लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गई हैं। 

राहत : उत्तराखंड में नहीं मिला कोरोना का नया स्ट्रेन

कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन को लेकर उत्तराखंड को बड़ी राहत मिली है। जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी पुणे (एनआईवी) भेजे ब्रिटेन से लौटे छह संक्रमितों के सैंपल नेगेटिव मिले हैं। जिसमें कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन नहीं मिला है। दो सैंपलों की रिपोर्ट आनी बाकी है। 

हाल ही में ब्रिटेन से लौटे आठ लोग कोरोना संक्रमित मिले थे। इसमें देहरादून में छह, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिला में एक-एक संक्रमित मिला था।

कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से आठ सैंपल जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे भेजे गए थे। लगभग एक सप्ताह एनआईवी से सैंपलों की रिपोर्ट मिली है। जिसमें छह सैंपलों में कोरोना का नया स्ट्रेन नहीं मिला है। दो सैंपलों की रिपोर्ट आनी बाकी है। 

राज्य कोविड कंट्रोल रूम के चीफ आपरेटिंग आफिसर डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने एनआईवी से सैंपलों की रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि छह सैंपलों में कोरोना का नया स्ट्रेन नहीं मिला है।

नए कोरोना स्ट्रेन के मरीजों के लिए बेड आरक्षित

ब्रिटेन से फैल रहे कोरोना के नए स्ट्रेन के मरीज देश में भी ट्रेस होने के बाद उत्तराखंड में भी सतर्कता बरती जा रही है। इसी के मद्देनजर राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 30 बेड जनरल और 10 बेड का आईसीयू वार्ड अलग से आरक्षित कर दिए गए हैं।

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल को कोविड-19 मरीजों के लिए पूरी तरह से समर्पित किया गया है। कोरोना के नए स्ट्रेन के संक्रमण के बढ़ने के चलते उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग सतर्क है।

दून अस्पताल के डिप्टी एमएस एवं कोरोना के स्टेट कोआर्डिनेटर डॉ. एनएस खत्री ने बताया कि ब्रिटेन से संक्रमित हुए संभावित मरीजों को देखते हुए जनरल वार्ड में 15 पुरुष और 15 महिला मरीजों के बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। इसके अलावा 10 बेड का आईसीयू वार्ड भी आरक्षित कर लिया गया है। हालांकि अब तक ब्रिटेन से आए स्ट्रेन के कोरोना मरीज दून में नहीं मिले हैं और न ही अस्पताल में इस तरह का कोई मरीज पहुंचा है।

साइड इफेक्ट हुआ तो दून अस्पताल तैयार

कोविड-19 के वैक्सीनेशन की शुरुआत होने के साथ ही इसके किसी भी तरह के साइड इफेक्ट से निपटने के लिए भी तैयारियों पर मंथन चल रहा है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने राजकीय दून मेडिकल अस्पताल को गढ़वाल मंडल के मरीजों के लिए टर्सरी केयर सेंटर के रूप में भी तैयार करने का निर्णय लिया है।

कोरोना की वैक्सीन लगाने के बाद अगर किसी भी मरीज को इसका किसी भी तरह का साइड इफेक्ट होता है तो उसके इलाज के लिए दून अस्पताल प्रशासन को तत्पर रहने को कहा गया है। इसके लिए बाकायदा तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। डॉ. एनएस खत्री ने दून अस्पताल को कोरोना वैक्सीनेशन टर्सरी केयर सेंटर बनाने के शासन के निर्णय की पुष्टि की है।
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मोबाइल पर आया मैसेज, आपको लगना है कोरोना वैक्सीन

कोविड-19 और ब्रिटेन से फैल रहे नए कोरोना संक्रमण की दहशत के बीच शुक्रवार को दूनवासियों को एक सुकून भरी खबर मिली। कोरोना से लड़ रहे फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों को मोबाइल पर एक मैसेज आया कि उन्हें कोरोना से बचने के लिए वैक्सीन लगानी है। भले ही यह कोरोना वैक्सीनेशन का पूर्वाभ्यास था, लेकिन कहीं न कहीं उन्हें इस मैसेज से राहत मिली। 

शुक्रवार को कोविड-19 से बचाव को लेकर वैक्सीनेशन से पहले जिले के 11 स्वास्थ्य केंद्रों पर ड्राई रन (पूर्वाभ्यास) किया गया। सभी केंद्रों पर सुबह नौ बजे ड्राई रन शुरू हुआ। इसके लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचे लोगों का ट्रायल पोर्टल के जरिये सत्यापन किया गया। इसके बाद वैक्सीनेशन ऑफिसर-2 के पास भेजा। यहां से लाभार्थी को वैक्सीनेशन रूम में भेजा। जहां से लाभार्थी को वैक्सीन लगाकर ऑबजर्वेशन के लिए करीब आधे घंटे बैठाया। उसके बाद कोई दिक्कत न होने का पूर्वाभ्यास कर उन्हें घर भेजा गया।

पूर्वाभ्यास में 240 लोग हुए शामिल
जिले में 11 केंद्र बनाए गए थे। हर केंद्र में 25 लाभार्थियों को वैक्सीनेशन का ड्राई रन के लिए चुना गया। इसके बाद जिले में 275 लाभार्थियों के वैक्सीनेशन के लिए चिह्नित किया गया, जिनमें से कुल 240 लाभार्थी वैक्सीनेशन स्थल पर पहुंचे। सभी लाभार्थियों को टीके की पहली डोज दी गई। एसएमएस के जरिये वैक्सीनेशन की पुष्टि के साथ अगली वैक्सीन की तिथि की सूचना भी दी गयी। ड्राई रन के सफलतापूर्वक संचालन के लिए बूथ सुपरवाइजर्स और मॉनीटर्स ने सभी सत्र स्थलों का निरीक्षण किया।

ये हैं ड्राई रन के लिए बनाए गए केंद्र
- एम्स ऋषिकेश
- कोरोनेशन हॉस्पिटल 
- पीएचसी अर्बन कारगी
- सीएचसी विकासनगर 
- पीएचसी कालसी 
- पीएचसी सेलाकुई 
- मैक्स हॉस्पिटल 
- सिनर्जी हॉस्पिटल 
- कैलाश हॉस्पिटल
- श्री महंत इन्दिरेश हॉस्पिटल
- हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट

यह रहा हाल
कोरोनेशन हॉस्पिटल में सुबह नौ बजे वैक्सीनेशन प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद किसी कर्मचारी का जैसे ही पोर्टल पर रिकार्ड चेक करने लगे तो इंटरनेट न चलने के कारण रिकार्ड चेक नहीं हो सका। रिस्पॉन्स न मिलने पर कर्मचारी सेशन साइट में इंटरनेट ही सर्च करते रहे। इस बीच करीब आधे घंटे के बाद जब कुछ देर के लिए इंटरनेट चला तो उसे दुरुस्त किया गया। कुछ देर बाद फिर कुछ देर के लिए सर्वर डाउन हो गया। करीब 1.30 बजे के बाद सर्वर नॉर्मल हुआ तब जाकर यहां पर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।

ड्राई रन के दौरान काफी कुछ सीखने को मिला, जिसका समावेश आगामी कोविड वैक्सीनेशन के दौरान किया जाएगा। जिस प्रकार स्वास्थ्य और अन्य विभाग के आपसी समन्वय के साथ कोविड-19 की रोकथाम में काम किया गया। इससे कोविड-19 पर अपेक्षित सफल होना निश्चित है।
- डॉ. अनूप कुमार डिमरी, सीएमओ, देहरादून
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