लक्खीबाग श्मशान घाट में कोरोना पॉजिटिव शव का दाह संस्कार करने को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध किया। पुलिस प्रशासन ने समिति व स्थानीय लोगों को गाइडलाइन का हवाला देते हुए समझाने का प्रयास किया, लेकिन लोग नहीं माने।
सीओ सिटी शेखर सुयाल, एसएचओ शिशु पाल नेगी मंगलवार को लक्खीबाग श्मशान घाट में प्रबंधन समिति व स्थानीय लोगों के साथ बैठक करने पहुंचे। उन्होंने लोगों को कोरोना पॉजिटिव का दाह संस्कार करने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने लोगों से अनावश्यक विरोध से बचने को कहा। लेकिन इसी बीच कई स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। लोगों का कहना है कि लक्खीबाग श्मशान आबादी वाले क्षेत्र में है।
इसके बजाय आबादी से दूर इलाकों में कोरोना मरीजों के शवों का अंतिम संस्कार होना चाहिए। इस पर पुलिस व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इसमें सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। किसी भी तरह से घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन, लोग सहमत नहीं हुए। इसके बाद पुलिस प्रशासन की टीम लौट गई।
कोरोना संक्रमित लोगों के शवों का अंतिम संस्कार कराना मुसीबत बन गया हैं। नाला पानी और लक्खीबाग श्मशान घाट पर विरोध के चलते अब नए शमशान घाट की शुरू हो गई है। इसी कड़ी में सीओ और एसडीएम ने माल देवता इलाके के शमशान घाट का अवलोकन किया।
कोरोना संक्रमित शव का अंतिम संस्कार के विरोध को लेकर सोमवार को जिलाधिकारी आशीष श्रीवास्तव ने अधिकारियों के साथ बात की थी। बताया गया थी कि गृह मंत्रालय की गाइडलाइन में साफ लिखा हैं कि नजदीकी शमशान घाट पर ही कोरोना संकमित के शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
सुझाव दिया गया कि नई संभावनाओ पर विचार कर लिया जाए। इसी कड़ी में सीओ सिटी शेखर सुयाल और एसडीएम सदर को शमशान घाट के प्रतिनिधियों से बात करने की जिम्मेदारी दी गई। मंगलवार को लखीबाग कमेटी तो एक बार अंतिम संस्कार को मान गई थी, लेकिन लोगों ने अपनी आपत्ति जता दी। शाम को दोनो अधिकारियों ने माल देवता के एक शमशान घाट का अवलोकन किया। दोनो अधिकारी देर रात जिला प्रशासन को अपनी रिपोर्ट देंगे। इसके बाद कोई फैसला होने की उम्मीद हैं।