भेल प्रशासन की ओर से दोनों प्लांटों को 24 घंटे चलाया जा रहा है। कर्मचारियों को ड्यूटी के हिसाब से कोरोना संक्रमण की गाइडलाइन के अनुसार बुलाया जा रहा है। अब तक विभिन्न क्षेत्रों के अस्पतालों को छह घन मीटर वाले लगभग 13 हजार ऑक्सीजन सिलिंडर भरकर दिए जा चुके हैं। एक बार में कम से कम दस सिलिंडर दिए जा रहे हैं।
अब तक भर चुके 13 हजार ऑक्सीजन सिलिंडर
मेडिकल संस्थाओं की ओर से तो भेल से ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाए ही जा रहे हैं, लेकिन ऑक्सीजन के संकट को देखते हुए गाजियाबाद जिला प्रशासन ने भी भेल का सहयोग लिया है। गाजियाबाद जिला प्रशासन की ओर से नियमानुसार 500 ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाकर आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए मंगवाए गए हैं। ये सिलिंडर जरूरतमंदों को दिए जा रहे हैं।
सेना के अस्पतालों में भी ऑक्सीजन की सप्लाई
भेल प्रशासन की ओर से उत्पादित ऑक्सीजन को सेना के अस्पतालों में भी ले जाया जा रहा है। आगरा और मेरठ के सैनिक अस्पताल में ऑक्सीजन के सिलिंडर ले जाए गए हैं। भेल के कार्यपालक निदेशक संजय गुलाटी ने बताया कि कोरोना काल में सैनिकों की सेवा करने का जो सौभाग्य प्राप्त हो रहा है, उस पर उन्हें गर्व है। ऑक्सीजन प्लांट में 200 कर्मचारी दिन-रात कार्य कर रहे हैं। भेल के अस्पताल को भी कोविड में तब्दील कर कोरोना संक्रमितों का उपचार किया जा रहा है।
दोनों ऑक्सीजन प्लांटों से उत्पादित ऑक्सीजन पहले हरिद्वार और उत्तराखंड को देना प्राथमिकता है। ऑक्सीजन देकर अधिक से अधिक कोरोना संक्रमितों की जान बचाई जा सके, बस दिन-रात इसी कोशिश में लगे हैं। अधिक से अधिक ऑक्सीजन तैयार करना उद्देश्य है।
-पीके श्रीवास्तव, नोडल एवं अपर महाप्रबंधक (मा.स) भेल, हरिद्वार