कोरोना वायरस की वृद्धि को रोकने के लिए 3-सीएलसी प्रो. ( 3-काइमोट्रिपसिन लाइक प्रोटिएज) नामक एंजाइम को निष्क्रिय करना जरूरी है। टीम ने अंत में मॉलिकुलर डॉयनेमिक्स और सिमुलेशन विधि से दो ऐसे यौगिकों का चयन किया गया जो कोरोना वायरस के खिलाफ प्रभावी ढंग से सक्रिय पाए गए।
शोध को प्रकाशित करने वाली टीम के सदस्यों में डॉ. महेशानंद, डॉ. प्रियंका मैती, तुषार जोशी, डॉ. वीना पांडे, डॉ. सुभाष चंद्रा, डॉ. एमए रामाकृष्णन और डॉ. जेसी कुनियाल शामिल हैं। जीबी पंत हिमालय पर्यावरण संस्थान के निदेशक डॉ. आरएस रावल, वरिष्ठ वैज्ञानिक किरीट कुमार ने टीम के सभी सदस्यों को बधाई दी।
इस शोध से वैज्ञानिक और शोधार्थी काफी उत्साहित हैं। वह चाहते हैं कि कोई भारतीय फार्मास्यूटिकल कंपनी इसके आधार पर कोविड की दवा बनाए। उन्होंने बताया कि अब कोविड के खिलाफ प्रभावी यौगिकों को पहचानने के बाद वनस्पति जगत में भी इसकी उपलब्धता को ज्ञात करने का प्रयास किया जाएगा।
इन यौगिकों की उपलब्धता वाली वनस्पतियों से भी इस बीमारी का उपचार संभव है। हालांकि इस शोध से निकले दो यौगिकों को पुन: क्लीनिकल ट्रायल और पेटेंट फाइल करने की संभावना है।