देहरादून में साप्ताहिक बंदी वाले दिन दुकान खोलने वालों पर जिला प्रशासन कार्रवाई करेगा। इसको लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने सभी अधीनस्थ अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर, व्यापारी नेताओं ने कहा कि वे सरकार के हर निर्णय में उनके साथ हैं। लेकिन बंदी केवल छोटे व मझोले दुकानदारों पर ही नहीं बल्कि बड़े मॉल व व्यापारियों पर भी लागू होनी चाहिए।
कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला प्रशासन ने हफ्ते में एक दिन दुकानें बंद रखने की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी कर ली है। जिलाधिकारी ने सिटी मजिस्ट्रेट और सभी उप जिलाधिकारियों को कहा कि साप्ताहिक बंदी के आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
साप्ताहिक बंदी के दौरान फल सब्जी, दूध, पेट्रोल पंप, रसोई गैस और दवाइयों की दुकान ही खुली रहेंगी। इसके अलावा अन्य सभी दुकानें बंद रहेंगी। उन्होंने कहा कि अगर साप्ताहिक बंदी के दौरान कोई दुकान खोलता है, तो उस पर महामारी अधिनियम व आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
दून वैली महानगर उद्योग व्यापार मंडल ने जिला प्रशासन के आदेश का समर्थन किया है। अध्यक्ष पंकज मेसोन ने कहा कि सभी व्यापारी कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में सरकार के साथ हैं। लेकिन साप्ताहिक बंदी का नियम केवल छोटे और मझोले व्यापारियों पर ही लागू नहीं होना चाहिए।
इस दौरान बड़े शॉपिंग मॉल, कांपलेक्स, शोरूम, डिपार्टमेंटल स्टोर और पिकनिक स्पॉट भी बंद रखे जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार कोरोना से निपटने के लिए छुट्टी कर रही है। लेकिन लोग पिकनिक स्पॉट पर पहुंचकर सरकार की मंशा पर पानी फेर दे रहे हैं।
कोरोना को लेकर बॉर्डर पर हो रही जांच का ज्यादा लाभ तो नहीं हो रहा है, उल्टे यात्रियों की परेशानी बढ़ रही है। यह कहना है नारसन बॉर्डर पर बाहरी प्रदेशों से पहुंच रहे तीर्थयात्रियों का। जांच के चलते घंटों की देरी से भी लोगों को परेशानी हो रही है। बॉर्डर पर जब यात्रियों से कोरोना जांच को लेकर प्रतिक्रिया ली गई तो इनका यही कहना था कि जांच हो तो सभी की हो। अधिकांश लोग जब बिना जांच के प्रदेश में प्रवेश कर रहे हैं तो सिर्फ उन्हें किस बात की सजा दी जा रही है।
नारसन बॉर्डर पर हो रही कोरोना की जांच को लेकर लोग तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं। बॉर्डर पर जो लोग परेशानी का सामना कर रहे हैं, उनकी राय में कोरोना जांच का सिस्टम बेअसर है। यात्रियों का कहना है कि बॉर्डर पर सुबह के समय चंद घंटे के लिए सभी यात्रियों को रोक दिया जाता है। इसके बाद लोगों को घंटों जांच के लिए इंतजार करना पड़ता है। दोपहर होते ही किट खत्म हो जाती है तो जांच बंद कर दी जाती है।
इसके बाद बॉर्डर पर दोपहर बाद पहुंचने वाले यात्रियों के लिए कोई रोकटोक नहीं है। यात्रियों का कहना था कि कोरोना जांच का तभी फायदा है, जब हर एक व्यक्ति की ईमानदारी से जांच हो। जब तक यह संभव नहीं है, तब तक किसी भी तरह की रोकटोक और प्रतिबंध उचित नहीं है। इसके अलावा यात्री कोरोना रिपोर्ट में देरी और शारीरिक दूरी का पालन नहीं कराए जाने पर रोष व्यक्त कर रहे हैं।
बॉर्डर पर दो घंटे लोगों को रोककर सैंपल ले रहे हैं। इसके बाद यात्रियों को बिना जांच के प्रवेश दिया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उन लोगों में कोरोना के लक्षण नहीं हो सकते। सरकार बेवजह लोगों को परेशान कर रही है।
- सुनील कुमार, हरियाणा
पहले स्थानीय लोगों को नहीं रोका जा रहा था, लेकिन अब स्थानीय लोगों को भी आवाजाही में परेशानी होने लगी है। उन्हें बॉर्डर पर रोका जा रहा है। इससे उनके काम प्रभावित हो रहे हैं। बॉर्डर से निकलने पर उनकी हर दिन जांच हो रही है।
- मनीष कुमार, पुरकाजी यूपी
जहां कोरोना की जांच हो रही है, वहां पर शारीरिक दूरी के नियमों की धज्जियां उड़ रही है। पुलिस स्वयं दूर खड़ी होकर लोगों को लाइनों में खड़ा रहने को मजबूर कर रही है। इससे और ज्यादा संक्रमण के बढ़ने की आशंका बढ़ रही है।
- अमित कुमार, नोएडा
सैंपल की रिपोर्ट में दो से चार दिन तक लग रहे हैं। सैंपल लेने के बाद लोगों को भेजा जा रहा है। जो लोग कोरोना पॉजीटिव होंगे, वे रिपोर्ट आने तक अन्य लोगों को भी संक्रमित करेंगे। इससे जांच का कोई फायदा होता नहीं दिख रहा।
- दीपक कुमार, मेरठ