कोविड-19 संक्रमण से उबर चुके लोग प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं। उनके शरीर में इस संक्रमण को बेअसर करने की प्रतिरोधी एंटीबॉडीज विकसित हो जाती हैं। इस एंटीबॉडीज की मदद से दूसरे कोविड मरीज के रक्त में मौजूद वायरस को खत्म किया जा सकता है। डोनर की आयु 18 से 60 और वजन 50 किलोग्राम होना चाहिए।
यह है प्लाज्मा थेरेपी
डोनर से सहमति मिलने के बाद ऐफेरेसिस तकनीक से खून निकाला जाता है। खून से केवल प्लाज्मा को निकालकर खून को फिर से डोनर के शरीर में वापस डाल दिया जाता है। डोनर महीने में दो बार प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। इस पूरी प्रक्रिया से कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि प्लाज्मा डोनेट करने से कमजोरी नहीं आती। यह रक्तदान की तरह ही है। इसलिए कोरोना से ठीक हो चुके लोग प्लाज्मा डोनेट करने से घबराएं नहीं।