प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर कौवों की मौत के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन पशुपालन विभाग का दावा है कि अभी तक प्रदेश में बर्ड फ्लू का कोई मामला सामने नहीं आया है। कौवों की मौत पर वन विभाग की ओर से सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। वहीं, एहतियात के तौर पर पशुपालन विभाग पोल्ट्री फार्मों से सैंपल जांच के लिए भेजेगा।
देश के राजस्थान, हरियाणा, पंजाब व हिमाचल प्रदेश समेत अन्य राज्यों में फैली बर्ड फ्लू के बीच उत्तराखंड में भी अलग-अलग क्षेत्रों में कौवों की मौत हो रही है। पशुपालन निदेशक डॉ.केके जोशी का कहना है कि प्रदेश में अभी तक बर्ड फ्लू का कोई मामला नहीं मिला है।
कौवों की मौत के अन्य कारण भी हो सकते हैं। मृत कौवों का सैंपल जांच के लिए वन विभाग के माध्यम से भेजे जा रहे हैं। पशुपालन विभाग की ओर से जिला व ब्लाक स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम नियमित रूप से पोल्ट्री फार्मों की निगरानी कर रही है। एहतियात के तौर पर विभाग की ओर से पोल्ट्री फार्मों से सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे।
समीपवर्ती राज्य हिमाचल में बर्ड फ्लू से कई पक्षियों की मौत के बाद राजाजी नेशनल पार्क और कार्बेट पार्क के बीच स्थित पौड़ी गढ़वाल जिला प्रशासन, वन और पशुपालन विभाग अलर्ट हो गया है। जिला प्रशासन की ओर से बाहरी राज्यों से मुर्गों की खरीद पर रोक लगा दी है। साथ ही यूपी बाॅर्डर समेत जिले की सीमाओं पर विशेष चौकसी बरती जा रही है। इसके लिए पांच टीमें गठित कर दी गई हैं। ब्लाक स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीमों का गठन भी किया गया है।
बर्ड फ्लू के खतरे की आशंका को देखते हुए डीएम डीएस गर्ब्याल के निर्देश पर पशुपालन विभाग, वन विभाग और स्वास्थ्य की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिले में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) और विकास भवन पौड़ी में दो कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। जिले में कोटद्वार स्थित यूपी बाॅर्डर, यमकेश्वर, नैनीडांडा, पौड़ी और श्रीनगर स्थित जिले की सीमाओं में विशेष चौकसी बरती जा रही है। बॉर्डरों पर टीमों की तैनाती कर दी गई है। सभी 15 ब्लाकों में रैपिड रिस्पांस टीमें गठित की गईं हैं। कहीं पर भी पक्षियों की संदिग्ध मौत की सूचना पर ये टीमें मौके पर पहुंचकर सैंपल जांच के लिए भेजेंगी।
पोल्ट्री फार्म के सैंपल पशुपालन विभाग द्वारा लिए जाएंगे। जबकि वन क्षेत्र में मृत पक्षियों के सैंपल वन विभाग द्वारा भेजे जाएंगे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पौड़ी डॉ. एसके बर्त्वाल ने बताया कि रिस्पांस टीम में एक डॉक्टर समेत चार कर्मियों का स्टाफ शामिल किया गया है। पक्षियों की मौत की सूचना और सैंपलिंग की कार्रवाई कंट्रोल रूम को उपलब्ध कराई जाएगी। जनपद के पांचों डीएफओ को पत्र भेजकर अपने क्षेत्र में चौकसी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
यहां से आते हैं विदेशी पक्षी
लैंसडौन वन प्रभाग और कार्बेट टाइगर रिजर्व के सोना नदी रेंज के कोल्हू नदी समेत आसपास के जंगल में सर्दी में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। इन क्षेत्रों में कड़ी नजर रखी जा रही है। वन विभाग के साथ ही रिस्पांस टीमें जिले में संचालित पोल्ट्री फार्म के अलावा वन विभाग के पार्कों में आने वाले पक्षियों पर नजर रख रहे हैं।