मुख्यमंत्री कार्यालय चार (घोषणा) के अनुभाग अधिकारी भी कोरोना की चपेट में आ गए हैं। संयुक्त सचिव मुख्यमंत्री कृष्ण सिंह ने अपर मुख्य सचिव सचिवालय प्रशासन को इसकी लिखित सूचना दी। सचिवालय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अनुभाग को बंद कर दिया है। साथ ही अनुभाग के बाकी स्टाफ को हाई रिस्क में होने की वजह से आइसोलेट करने का अनुरोध किया गया है। अनुसचिव व उपसचिव के कक्षों को भी सैनिटाइज किया जाएगा।
युवा कल्याण के पीआरडी स्वयंसेवक को भी कोराना
प्रभारी सचिव खेल एवं युवा के कैंप कार्यालय में तैनात पीआरडी स्वयंसेवक की भी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आई है। प्रभारी सचिव के वरिष्ठ निजी सचिव अनिल कुमार मिश्रा ने अपर मुख्य सचिव सचिवालय प्रशासन को इसकी लिखित सूचना दे दी है। उन्होंने पत्र में कहा है कि पीआरडी जवान उनके और उनके अन्य स्टाफ के सीधे संपर्क में रहा है। उन्होंने व स्टाफ ने सेल्फ आइसोलेशन की अनुमति मांगी है।
सचिवालय में कर्मचारियों की संख्या सीमित करने की मांग
सचिवालय कर्मचारी की मौत और दो और कोरोना पॉजिटिव केस मिलने के बाद उत्तराखंड सचिवालय संघ ने मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव सचिवालय प्रशासन से कर्मचारियों की संख्या को कम करने की मांग की है। वर्तमान में सचिवालय में 50 प्रतिशत कर्मचारी सचिवालय आ रहे हैं। सचिवालय संघ की मांग है कि इसे कम कर 30 प्रतिशत किया जाए।
विधायक आवास में अब कोई भी थर्मल स्क्रीनिंग, नाम पते की जांच के बिना प्रवेश नहीं कर पाएगा। आवास के मुख्यद्वार पर चेक पोस्ट बनेगी। राज्य संपित्ति विभाग ने इस चेक पोस्ट के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती का भी प्रस्ताव बनाया है।
राज्य सपंत्ति विभाग के सचिव आर के सुधांशु की ओर से जारी आदेश के तहत गृह विभाग की ओर से पुलिस अधिकारियों को विधायक आवास के बाहर पुलिस पिकेट स्थापित करने के लिए पत्र लिखा जाएगा। विधायक आवास की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के लिए मुख्यद्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग होगी और हर आने वाले के नाम पते आदि का रजिस्टर बनाकर रखा जाएगा। इसके साथ ही विधायक आवास में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का भी रिकार्ड रखा जाएगा। कोविड संक्रमण से सुरक्षा की दृष्टि विधायक आवास में साफ सफाई के साथ ही हर फ्लोर में सेनेटाइजर की व्यवस्था भी की जाएगी।
विधायक आवास की सुरक्षा के मामले को लेकर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने पूर्व में नाराजगी भी जाहिर की थी। अध्यक्ष से करीब छह विधायकों ने विधायक आवास में सुरक्षा की कोई व्यवस्था न होने की शिकायत की थी। विधानसभा अध्यक्ष ने इस मामले में खुद विधायक आवास का निरीक्षण करना भी तय किया था। निरीक्षण तो नहीं हो पाया लेकिन अध्यक्ष ने राज्य संपत्ति विभाग के अधिकारियों से बात की थी। इसके बाद इस मामले को उन्होंने मुख्य सचिव के सामने भी रखा था और बाद में राज्य संपत्ति सचिव आरके सुधांशु सहित अन्य अधिकारियों से भी बात की थी। इतना होने पर भी इस मामले में बात आगे न बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष ने खासी नाराजगी भी जताई थी।