शोधकर्ता यह जाने की कोशिश कर रहे हैं कि किस आयु वर्ग, महिला या पुरुष और क्षेत्रों के लोगों में कोरोना संक्रमण ज्यादा हो रहा है। साथ ही किन दवाओं से मरीजों को फायदा मिल रहा है और कौन से मरीज जल्दी या देरी से ठीक हो रहे हैं। इसका डाटा जुटाया जा रहा है।
इसी तरह, मरीजों के उपचार में जुटे डॉक्टरों और अन्य स्टाफ में संक्रमण की संभावना और उन्हें एहतियातन दी जा रही दवा, ड्यूटी के साथ ही इन दवाओं को लेने में उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव आदि पर अध्ययन किया जा रहा है।
इसके अलावा सैंपल रिपोर्ट और मरीजों के ठीक होने की जानकारी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) को भी भेजी जा रही है।
दून अस्पताल को फिलहाल कोविड-19 अस्पताल के रूप में तब्दील किया गया है। यहां भर्ती लगभग सभी मरीज ठीक हो कर जा चुके हैं, इस लिहाज से यहां के मरीजों, डॉक्टरों और स्टॉफ पर शोध महत्वपूर्ण है।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना के अनुसार अलग-अलग टीमें विभिन्न बिंदुओं पर शोध कर रही हैं। इनका आपस में आदान-प्रदान भी किया जा रहा है।
कोई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने पर आईसीएमआर से भी साझा किया जाएगा।