इन दिनों जब मरीजों को वेंटिलेटर तो छोड़ो ऑक्सीजन बेड तक नसीब नहीं हो पा रहे हैं, ऐसे में अमर उजाला ने इस पोर्टेबल वेंटिलेटर सिस्टम की पड़ताल की तो पता चला कि तकनीक तैयार है, लेकिन व्यावसायिक उत्पादन अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।
उस वक्त शोध के बाद इस तकनीक को विकसित करने वाली टीम में आईआईटी रुड़की के प्रो. अक्षय द्विवेदी व प्रो. अरूप दास के साथ ही एम्स ऋषिकेश के एनेस्थिसिया विभाग के प्रो. देवेंद्र त्रिपाठी शामिल थे।
इसके अलावा उत्तर भारत में विश्व स्तरीय तकनीक की एडवांस सिमुलेशन लैब से सुसज्जित एम्स ऋषिकेश में भी इस सिस्टम का परीक्षण सफल रहा है। प्राणवायु वेंटिलेटर विकसित करने वाली टीम के सदस्य व एम्स ऋषिकेश के एनेस्थिसिया विभाग के प्रो. देवेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि इस सिस्टम का कई बीमारियों में चिकित्सकीय परीक्षण किया गया है।
जो कि ह्यूमन सिमुलेटर आधारित था। उन्होंने इस वेंटिलेटर को कोविड एआरडीएस के उपचार में भी अति लाभकारी बताया। उन्होंने बताया कि इसके अलावा इस सिस्टम को अस्थमा, श्वास और पैरालयसिस के रोगियों के लिए भी जीवन रक्षक प्रणाली के तौर पर उपयोग में लाया जा सकता है। गत वर्ष इसके व्यावसायिक उत्पादन की बात हुई थी, लेकिन फिर कोविड की लहर धीमी पड़ गई और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
कोविड उपचार की दृष्टि से अत्यधिक लाभकारी इस वेंटिलेटर को निहायत कम लागत में तैयार किया जा सकता है। अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाओं से सुसज्जित प्राणवायु वेंटिलेटर सिस्टम स्वचालित प्रक्रिया से सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। आईसीयू में भर्ती मरीजों के लिए यह वेंटिलेटर जीवन रक्षक के तौर पर मददगार साबित होगा।
इस प्रोजेक्ट में आईआईटी रुड़की की करीब 20 लोगों की टीम शामिल थी। जिसमें फैकल्टी से लेकर स्टूडेंट तक शामिल थे। हमने इसे बहुत कम संसाधनों और कम खर्च में तैयार किया था। कोविड की पहली लहर के धीमा पड़ते ही इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू नहीं हो सका। इस वक्त तकनीक तैयार है। वेंटिलेटर सभी टेस्ट में खरा उतरा है। इसके दो पेटेंट भी करा लिए गए हैं। अब जब कोरोना की दूसरी लहर आई है, तब कई कंपनियां इसके व्यावसायिक उत्पादन के लिए संपर्क कर रही हैं। यह छोटा है, सस्ता है और छोटे अस्पताल भी लगा सकते हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों शीघ्र ही इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू होगा।
- प्रो. अक्षय द्विवेदी, टीम डेवलपर के सदस्य, आईआईटी, रुड़की
प्राणवायु पोर्टेबल वेंटिलेटर सिस्टम कोविड 19 के साथ ही अन्य सभी बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के लिए लाभदायक है। इसे पिछले साल अप्रैल-2020 में आईआईटी रुड़की के सहयोग से तैयार किया था। वैज्ञानिकों का काम तकनीक तैयार करना होता है, जो उन्होंने बखूबी किया। जहां तक रही व्यावसायिक उत्पादन की बात, तो जब तक कोई कंपनी सामने नहीं आती, हम इस दिशा में कुछ नहीं कर सकते।
- प्रो.रविकांत, निदेशक एम्स ऋषिकेश