शव को काले बैग में देख श्मशान के पंडित और कर्मचारी वहां जमा हो गए। उन्होंने शव के साथ पहुंचे लोगों से पूछताछ की।
बताया कि अस्पताल से सामान्य तरीके से शव भेजा जाता है। उन्होंने शव किसी कोरोना पॉजिटिव का होने की आशंका जताते हुए अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया।
घंटाघर निवासी व्यक्ति ने बताया कि उसके भाई की मौत सामान्य बीमारी से हुई है। लेकिन पंडित और कर्मचारी फिर भी तैयार नहीं हुए। बाद में श्मशान प्रबंधन समिति के प्रयास से पंडित की व्यवस्था की गई और दाह संस्कार हो पाया।