उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। बीते एक सप्ताह में 6375 संक्रमित मामले मिले, जबकि 4049 मरीज ठीक हुए हैं। पिछले सप्ताह की तुलना में रिकवरी में बढ़ोतरी हुई और मरने वालों की संख्या में कमी आई है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना काल के 26 वें सप्ताह में 65397 सैंपलों की जांच की गई। 25वें सप्ताह की तुलना में संक्रमित मामले और रिकवरी बढ़ी है। लेकिन मरने वाले संक्रमितों की संख्या 80 से घट कर 72 फीसदी रही है।
कोरोना आंकड़ों का अध्ययन कर रहे सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने कहा कि अनलॉक-4 में कोरोना संक्रमण में तेजी आई है। संक्रमण की चेन को तोड़ने को सरकार को नई रणनीति पर काम करना होगा।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य की सीमा पर सभी लोगों के लिए कोरोना जांच अनिवार्य नहीं है। कोरोना जांच को लेकर बने भ्रम पर उन्होंने अधिकारियों को राज्य की सीमाओं पर सूचना पट् (बोर्ड) लगाने के निर्देश दिए हैं। इन बोर्ड पर स्पष्ट जानकारी होगी कि किन लोगों के टेस्ट किए जाने हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें मीडिया से यह जानकारी मिली कि कोरोना जांच के लिए निर्धारित दरों से अधिक धनराशि ली जा रही है। बॉर्डर पर लगाए जाने वाले सूचना पट्टों में कोरोना जांच की दर का भी उल्लेख किया जाएगा।
प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को राज्य की सीमाओं पर कोरोना टेस्ट कराए जाने को लेकर आदेश जारी किया था। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि वे अपने जिलों की सीमाओं पर कोरोना टेस्ट का बंदोबस्त कराएं। बॉर्डर पर कोरोना टेस्ट अनिवार्यता को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। सचिव स्वास्थ्य का भी कहना है कि सीमाओं पर बाहर से आने वाले सबके कोविड टेस्ट नहीं किए जाएंगे।
उच्च कोरोना संक्रमण क्षेत्रों से आने वाले और होटल व होम स्टे में बुकिंग कराने वाले पर्यटकों को ही अपने खर्च पर जांच की सुविधा दी जाएगी। इसके बावजूद लोगों में टेस्टिंग को लेकर भ्रम बना हुआ है। रोजाना बॉर्डर पार आवाजाही करने वाले भी कोविड टेस्टिंग को लेकर चिंता में हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे राज्य की सीमाओं पर सूचना पट्ट लगाकर स्पष्ट करें कि किन किन लोगों के टेस्ट किए जाने हैं और इसके लिए क्या दर निर्धारित है।