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उत्तराखंड में कोरोना : बच्चों के लिए भी जरूरी है कोरोना का सही इलाज, विशेषज्ञों ने कहा - डॉक्टर से सलाह जरूर लें

Thu, 13 May 2021 02:09 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून

सार

देेहरादून के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे तरह-तरह के संदेशों से भ्रम की स्थिति बन जाती है। यदि बच्चे को कोई भी तकलीफ हो तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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कोरोना की दूसरी लहर बच्चों को भी निशाना बना रही है - फोटो : social media
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विस्तार
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कोरोना की दूसरी लहर बच्चों को भी निशाना बना रही है। ऐसे में बच्चों का भी सही समय पर सही उपचार बहुत जरूरी है। यह कहना है देेहरादून के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों का। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे तरह-तरह के संदेशों से भ्रम की स्थिति बन जाती है। यदि बच्चे को कोई भी तकलीफ हो तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में बताया जा रहा है कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों को संक्रमण होने पर उपचार की जरूरत नहीं पड़ती। अमर उजाला ने वीडियो के तथ्यों की सच्चाई जानने के लिए देहरादून के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों से बातचीत की। बाल रोग विशेषज्ञों ने इन तथ्यों को गलत करार दिया। डॉक्टरों ने बताया कि इतना जरूर है कि स्वस्थ बच्चों की इम्युनिटी मजबूत होती है।
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बच्चों के फेफड़े और दूसरे अंग भी वयस्कों की अपेक्षा स्वस्थ होते हैं। ऐसे में वायरस आमतौर पर उन पर ज्यादा घातक असर नहीं कर पाता है। इससे बच्चे संक्रमण से जल्द छुटकारा पा लेते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक साल से कम उम्र के बच्चों में संक्रमण का जोखिम बहुत अधिक रहता है। इसलिए बच्चों को भी सही समय पर सही उपचार दिया जाना बहुत जरूरी है। इस मुद्दे पर प्रस्तुत है शहर के चार वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया... 

अभिभावकों के संक्रमित होने या अन्य कारणों से बच्चों में भी संक्रमण हो रहा है। कुछ बच्चों में लक्षण सामने नहीं आता। जबकि कुछ बच्चों में बुखार, उल्टी, दस्त, खांसी जैसे लक्षण देखने मिल रहे हैं। अभिभावक डॉक्टरों से फोन पर सलाह लेकर घर में ही दवा देकर बच्चों का इलाज कर रहे हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों को संक्रमण से बचाव के लिए इलाज की जरूरत नहीं पड़ती। स्थिति गंभीर लगने पर अभिवावकों को चाहिए कि बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाएं। 
-डॉ. जेपी देवशाली, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ एवं पूर्व उप निदेशक उतराखंड स्वास्थ्य विभाग

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15 बच्चों का आईसीयू और चार बच्चों को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखकर इलाज किया

दून अस्पताल में अब तक 15 बच्चों का आईसीयू और चार बच्चों को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखकर इलाज किया जा चुका है। अन्य बच्चों का उपचार भी किया जा चुका है। एक साल से कम उम्र वाले बच्चों को तो कोरोना समेत किसी भी तरह के संक्रमण का बहुत अधिक जोखिम होता है। जहां तक घर में बच्चों के ठीक होने का सवाल है तो संक्रमित होने के बाद अभिवावक डॉक्टरों की सलाह पर जरूरी दवाएं दे रहे हैं। इम्युनिटी अच्छी होने पर बच्चे जल्दी ठीक हो जाते हैं। स्थिति गंभीर होने पर बच्चों को अस्पताल जरूर लाएं।
-डॉ. अशोक कुमार, विभागाध्यक्ष बाल रोग विभाग, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल

एक तो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। दूसरा बच्चों में इंजाइटी नहीं होती है। बच्चों में सामान्य प्रकार के तमाम टीके लगाए रहते हैं, उससे भी विभिन्न रोगों के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी पैदा होती रहती है। शारीरिक रूप से कमजोर या अन्य बीमारियों से पीड़ित बच्चों में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। संक्रमित बच्चों का डॉक्टर की सलाह पर घर में ही इलाज किया जा सकता है। संक्रमित होने पर बच्चों को इलाज की जरूरत नहीं पड़ती, यह बात निराधार है। बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाएं।
-डॉ. प्रताप सिंह रावत, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ राजकीय जिला गांधी शताब्दी अस्पताल

अस्पतालों में ज्यादातर गंभीर बीमार बच्चे ही आ रहे हैं। ज्यादातर बच्चों को अभिभावक डॉक्टरों से परामर्श लेकर घर पर ही दवा दे रहे हैं। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वयस्कों से अच्छी होती है। ऐसे में स्वस्थ बच्चों को वायरस ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाता। ऐसा नहीं है कि बच्चे बिना उपचार के ठीक हो जाते हैं। बल्कि तीसरी लहर में तो बच्चों में ही ज्यादा संक्रमण की आशंका जताई जा रही है। इसका कारण यह भी है कि वयस्कों का टीकाकरण हो रहा है। ऐसे में बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है। 
-डॉ. तन्वी सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर एवं वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल
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