प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों के दूरदराज व दुर्गम गांवों के बुजुर्गों, महिलाओं व बच्चों के लिए केंद्रों पर टीकाकरण कराना संघर्षपूर्ण हो गया है।
बीमार और उम्रदराज बुजुर्गों के लिए टीकाकरण केंद्रों तक पहुंचने में मुश्किल आ रही है। उत्तरकाशी के पुरोला क्षेत्र से जुड़ी ऐसी शिकायतें मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची हैं। सोशल मीडिया पर भी बुजुर्गों के टीकाकरण की मांग को मुद्दा वायरल हो रहा है। चुनाव अभियान की तर्ज पर राज्य के करीब 11 हजार बूथों पर टीकाकरण करने की मांग उठ रही है।
पहाड़ से सरोकार रखने वाले कर्मचारी नेता राकेश जोशी व प्रदीप पपनै ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पर्वतीय क्षेत्रों में असमर्थ व बुजुर्ग लोगों के टीकाकरण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने का अनुरोध किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण बुजुर्गों को टीकाकरण के लिए पेश आ रही दिक्कतों का जिक्र किया है।
उन्होंने लिखा है कि शहरी क्षेत्रों में टीकाकरण के लिए कई तरह के कैंप लगाए गए हैं, लेकिन ग्रामीण लोगों के लिए विकासखंड स्तर एक या दो दिन के लिए कैंप आयोजित हो रहे हैं। ग्रामीण बुजुर्गों को कई-कई किमी दूरी तय करके टीकाकरण कराने के लिए आना पड़ रहा है। उन्होंने टीकाकरण केंद्रों का विस्तार न्याय पंचायत व ग्राम पंचायत स्तर करने की मांग की।
बूथों पर हो टीकाकरण अभियान
सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने ट्वीट किया कि उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में बहुत से बुजुर्गों को कोविड टीके के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सरकार के पास चुनाव का अनुभव है और राजनीतिक दलों के पास संगठन हैं। अगर सरकार चाहे तो रचनात्मक तरीके से सोचते हुए चुनाव की तर्ज पर 11000 बूथों पर टीके की व्यवस्था कर सकती है।
मुख्यमंत्री कह चुके हैं गांव-गांव में होगा टीकाकरण
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का कहना है कि बुजुर्ग, महिलाएं व ऐसे सभी लोग जो किन्हीं कारणों से समर्थ नहीं हैं, उनका टीकाकरण उनके गांवों में जाकर किया जाना है। सरकार का लक्ष्य गांव-गांव में टीकाकरण अभियान चलाने का है। इस दिशा में काम हो रहा है।