हरिद्वार में अप्रैल में कोरोना का पहला मामला प्रकाश में आया था। शुरुआत में रोजाना 50 से 100 लोगों की जांच की गई। मई में मरीज बढ़े तो जांच का आंकड़ा 250 से 300 तक पहुंच गया। जून में प्रवासियों की घर वापसी शुरू हुई। तब सैंपलिंग की संख्या बढ़कर 700 से 900 की गई।
जुलाई से औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मामले सामने आए। तब स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल लेने की संख्या एक हजार से 1500 तक कर दी। अगस्त और सितंबर में बड़े पैमाने पर कोरोना मरीज मिलने लगे। इसपर स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना सैंपलिंग की क्षमता बढ़ाकर रोजाना दो हजार से 2500 तक कर दी। अब एक बार फिर जांच की संख्या बढ़ाई जा रही है।
हरिद्वार में कोरोना सैंपलिंग की क्षमता बढ़ाई जा रही है। रोजाना पांच हजार सैंपल एकत्र करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए सैंपल कलेक्शन टीम की संख्या बढ़ाई गई है। वहीं, निर्धारित शुल्क पर कोरोना जांच के लिए इच्छुक निजी लैबों को सूचीबद्ध किया जा रहा है।
- एसके झा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हरिद्वार