पिछले 15 दिनों से वह अपने घर में अलग कमरे में रहते हैं ताकि संक्रमित हो जाएं तो परिजनों को बचा सकें। हेड मास्टर को पीपीई किट में देखकर कोई नहीं पहचानता है। लोगों को लगता है कि नगर निगम के कर्मी सेवा में लगे हैं। उनकी टीम में सोनू विर्क व नरेश भी शामिल हैं।
हेड मास्टर अरुण चुघ किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनका कहना है कि एक बार खून नहीं मिलने पर उनके किसी परिचित की मौत हो गई। उसी दिन उन्होंने तय कर लिया था कि जब खून देने की बारी आएगी वह पीछे नहीं हटेंगे। साल में तीन बार वह रक्तदान कर रहे हैं। अभी तक 27 बार वह रक्तदान कर चुके हैं।
ऑनलाइन कराते हैं पढ़ाई
चुघ ने बताया कि वह पिछले तीन दिन से ऑनलाइन कक्षा नहीं ले पा रहे हैं। श्मशान घाट में कोरोना संक्रमितों के शवों के पहुंचने में इजाफा हो रहा है। उन्हें जब भी समय मिलता है वह बच्चों के परिजनों को मैसेज भेजकर ऑनलाइन कक्षा का समय बता देते हैं। बच्चे भी उनकी क्लास पढ़ने के लिए जुड़ जाते हैं।