होम आइसोलेट करने से पहले चिकित्सकीय टीम संक्रमित के स्वास्थ्य की पूरी जांच करती है। संक्रमित में प्रत्यक्ष लक्षण न होने के बाद ही उसको होम आइसोलेट किया जाता है। साथ ही घर पर आइसोलेशन रूम की व्यवस्था भी परखी जाती है। मरीज के तीमारदार को देखभाल का प्रशिक्षण दिया जाता है।
32 टीम करती हैं होम आइसोलेशन की निगरानी
जिले में 32 टीम होम आइसालेट किए गए संक्रमितों की निगरानी करती हैं। वहीं आशाओं की टीम भी होम आइसोलेट संक्रमित के स्वास्थ्य की जानकारी जुटाती रहती है। होम आइसोलेशन हेल्पलाइन की 26 टीम दिन में दो बार संक्रमित से बात करती है। किसी भी इमरजेंसी की स्थित में तत्काल संक्रमित तक चिकित्सकीय मदद पहुंचायी जाती है।
होम आइसोलेशन की व्यवस्था लागू होने के बाद संक्रमण के नए मामले कम हुए हैं। व्यवस्था को और अधिक बेहतर बनाने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. एसके झा, मुख्य चिकित्साधिकारी