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वन्यजीवों को बीमारियों से बचाने की कवायद तेज, खोले जाएंगे वाइल्डलाइफ रिहैबिलिटेशन एंड डिजीज सर्विस सेंटर

Sat, 31 Oct 2020 08:02 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
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देश के सभी टाइगर रिजर्व व वन्यजीव अभयारण्यों में शेर, बाघ, हाथी, तेंदुआ, सांभर हिरण समेत तमाम प्रजातियों के वन्यजीवों को जानलेवा बीमारियों से बचाया जा सके।

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इसके लिए केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से तैयार किए गए नेशनल वाइल्डलाइफ एक्शन प्लान के तहत सभी टाइगर रिजर्व में इलाज की उच्च सुविधाओं से युक्त वाइल्डलाइफ रिहैबिलिटेशन एंड डिजीज सर्विलेंस सेंटर खोलने की तैयारी है। इन सेंटरों को खोलने के साथ ही यहां पर प्रशिक्षित पशु चिकित्सा अधिकारियों को भी तैनात किया जाना है।

मंत्रालय की ओर से तैयार किए गए प्लान के तहत सभी टाइगर रिजर्व में वाइल्डलाइफ रिहैबिलिटेशन एंड डिजीज सर्विलेंस सेंटर को साल 2023 तक खोला जाना है। मंत्रालय के निर्देश पर जिम कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व समेत देश के कई टाइगर रिजर्व में इस पर काफी काम भी कर लिया गया है। वाइल्डलाइफ रिहैबिलिटेशन कम डिजिटल सेंटर खोलने के साथ ही वहां डॉक्टरों की भी तैनाती कर दी गई है। 
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बीमारियों का जीआईएस आधारित डाटाबेस तैयार होगा 

नेशनल वाइल्डलाइफ एक्शन प्लान में वन्यजीवों को बीमारियों से बचाने के लिए जो योजना बनाई गई है, उसके तहत वन्यजीवों में होने वाली बीमारियों का जीआईएस आधारित नेशनल डाटाबेस तैयार किया जाना है। योजना को धरातल पर उतारने के लिए मंत्रालय के अलावा भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून और इंडियन वेटिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट समेत देश के कई अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों की मदद ली जाएगी। 

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बाघों व हाथियों को वायरस का खतरा 

वन्यजीव विज्ञानियों के अनुसार टाइगर रिजर्व के बाघों और हाथियों समेत विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों को कई बीमारियों से खतरा है। जहां एक तरफ बाघों को कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी से गंभीर खतरा है तो वहीं हाथियों को इंडोथैलियोट्रॉपिक हरपीज वायरस यानी ईईएचवी का गंभीर खतरा है। उत्तर-पूर्व के राज्यों में वन क्षेत्रों में पाई जाने वाली बकरियों में गोट पॉक्स नामक बीमारी का गंभीर खतरा रहता है।

जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों, हाथियों समेत अन्य वन्यजीवों को बीमारियों से बचाने के साथ ही इलाज को लेकर हर संभव कदम उठाए गए हैं। दोनों टाइगर रिजर्व में विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती के साथ ही प्रोजेक्ट टाइगर के तहत भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों की भी मदद ली जा रही है। 
- जेएस सुहाग, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, उत्तराखंड

देश के सभी टाइगर रिजर्व के बाघों, हाथियों समेत वन्यजीवों को बीमारियों से बचाने को लेकर भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से हरसंभव कदम उठाए गए हैं। संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से वाइल्डलाइफ रिहैबिलिटेशन एंड रिसर्च सेंटर खोलने को लेकर तकनीकी सहयोग भी किया जा रहा है। वन्यजीवों में होने वाली बीमारियों को लेकर संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम शोध कर रही है। 
- डॉ. धनंजय मोहन, निदेशक भारतीय वन्यजीव संस्थान 
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