वन्यजीव विज्ञानियों के अनुसार टाइगर रिजर्व के बाघों और हाथियों समेत विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों को कई बीमारियों से खतरा है। जहां एक तरफ बाघों को कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी से गंभीर खतरा है तो वहीं हाथियों को इंडोथैलियोट्रॉपिक हरपीज वायरस यानी ईईएचवी का गंभीर खतरा है। उत्तर-पूर्व के राज्यों में वन क्षेत्रों में पाई जाने वाली बकरियों में गोट पॉक्स नामक बीमारी का गंभीर खतरा रहता है।
जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों, हाथियों समेत अन्य वन्यजीवों को बीमारियों से बचाने के साथ ही इलाज को लेकर हर संभव कदम उठाए गए हैं। दोनों टाइगर रिजर्व में विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती के साथ ही प्रोजेक्ट टाइगर के तहत भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों की भी मदद ली जा रही है।
- जेएस सुहाग, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, उत्तराखंड
देश के सभी टाइगर रिजर्व के बाघों, हाथियों समेत वन्यजीवों को बीमारियों से बचाने को लेकर भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से हरसंभव कदम उठाए गए हैं। संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से वाइल्डलाइफ रिहैबिलिटेशन एंड रिसर्च सेंटर खोलने को लेकर तकनीकी सहयोग भी किया जा रहा है। वन्यजीवों में होने वाली बीमारियों को लेकर संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम शोध कर रही है।
- डॉ. धनंजय मोहन, निदेशक भारतीय वन्यजीव संस्थान