अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही युवती कोरोनेशन अस्पताल में उपचार करवा रहे अपने भाई के पास पहुंच गई। मंगलवार को आसपास के मरीजों और अस्पताल स्टाफ को इसकी जानकारी मिली, तो अस्पताल में हड़कंप मच गया। अन्य भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों ने पॉजिटिव मरीज को वहां से हटाने की मांग की।
इसको लेकर कई लोगों ने अपना विरोध भी जताया। उन्होंने कहा कि कोरोना पॉजिटिव रही युवती को सामान्य मरीजों के साथ नहीं रखा जाना चाहिए। इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने युवती को सर्वे चौक स्थित कोविड केयर सेंटर शिफ्ट कर दिया।
अस्पताल की गलती से पैदा हुआ भ्रम
कोविड नोडल अफसर डा. एनएस खत्री ने बताया कि नई गाइडलाइन के अनुसार 10 दिन अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान जिन मरीजों में कोई लक्षण नहीं दिखता या स्वास्थ्य खराब नहीं होता, उन्हें होम क्वारंटीन करने की व्यवस्था है।
उन्होंने बताया कि युवती को 28 मई को दून अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से आठ जून को डिस्चार्ज किया गया। उन्होंने कहा कि इस दौरान युवती के भाई के दो बार सैंपल लिए गए, जिसमें रिपोर्ट नेगेटिव आई है। हालांकि युवक को कई अन्य दिक्कतें हैं, जिसके कारण उसे फिलहाल अस्पताल में भर्ती रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि तय गाइडलाइन के अनुसार युवती को 10 दिन भर्ती रखने के बाद डिस्चार्ज किया गया। हालांकि डिस्चार्ज स्लिप में भर्ती करने की तारीख गलती से 28 मई के बजाय तीन जून लिखी गई, जिससे ये भ्रम पैदा हुआ
कि युवती को पांच दिन में ही डिस्चार्ज कर दिया गया है।
युवती को अपने भाई को छोड़ने को तैयार नहीं है। यही कारण है कि तय गाइडलाइन के अनुसार 10 दिन भर्ती रहने पर जब युवती को डिस्चार्ज किया गया तो वो सीधे अस्पताल भाई के पास कोरोनेशन अस्पताल पहुंच गई। बीमारी के कारण उसके भाई को चलने-फिरने और उठने-बैठने में परेशानी है। बहन ही पिछले काफी समय से भाई की देखभाल कर रही थी।
दून अस्पताल से युवती का जो डिस्चार्ज कार्ड था, उसमें भर्ती होने की तिथि तीन जून और डिस्चार्ज की तिथि आठ जून लिखी थी। कोरोना पॉजिटिव को पांच दिन में अस्पताल से छुट्टी दिए जाने और उससे कोरोनेशन पहुंचने की बात से स्टाफ और अन्य मरीज डर गए। हमने गाड़ी की व्यवस्था कर उसे कोविड केयर सेंटर भेज दिया।
-डा. भागीरथी जंगपांगी, सीएमएस, कोरोनेशन अस्पताल