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नैनीताल : कोरोना संक्रमित एरीज के पूर्व निदेशक डॉ. अनिल पांडे का निधन, थे उत्तराखंड मूल के पहले खगोलविद

Sat, 24 Apr 2021 02:08 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल

सार

वह वर्ष 2013 में एरीज के कार्यकारी निदेशक और मार्च 2017 से नवंबर 2018 तक पूर्ण निदेशक रहे।
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सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. अनिल पांडे - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. अनिल पांडे का शुक्रवार सुबह हल्द्वानी के एक प्राइवेट अस्पताल में निधन हो गया। अन्य बीमारियों के साथ-साथ वह कोरोना संक्रमित भी पाए गए थे। वह उत्तराखंड मूल के पहले खगोलविद थे जो एरीज जैसे बेहद महत्वपूर्ण संस्थान में शीर्ष पद पर रहे। वह वर्ष 2013 में एरीज के कार्यकारी निदेशक और मार्च 2017 से नवंबर 2018 तक पूर्ण निदेशक रहे।

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एरीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे ने बताया कि डॉ. अनिल पांडे सेवानिवृत्ति के बाद से हल्द्वानी की अमलतास कॉलोनी कमलुवागांजा में रहते थे। बीते कुछ दिनों से वह बीमार थे। चार दिन पहले ही उन्हें हल्द्वानी के प्राइवेट निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह अपने पीछे पत्नी, माता और पुत्र को छोड़ गए हैं।
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डॉ. पांडे ने खगोल के क्षेत्र में ताईवान और थाईलैंड से विशेष करार किया था। उन्होंने एशिया की सबसे बड़ी 3.6 मीटर व्यास की देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप-डॉट व चार मीटर व्यास की लिक्विड मिरर टेलीस्कोप लगाने और दुनिया की सबसे बड़ी प्रस्तावित ‘थर्टी मीटर टेलीस्कोप’ के लिए भारत की ओर आधार संरचना तैयार करने सहित अन्य वैज्ञानिक गतिविधियों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उन्होंने अपने कुछ सहयोगियों के साथ पिछले साल ही थाईलैंड में 130 नये तारों की भी खोज की थी।

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विक्रम साराभाई अवार्ड समेत मिले थे कई पुरस्कार

आर्य भट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) से सेवानिवृत्त सेवानिवृत्त होने के बाद भी डॉ. अनिल पांडे शोध कार्यों में सक्रिय थे। तारा समूहों और तारा गुच्छों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि थी।

उनकी सक्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीते छह माह में उनके चार शोध संबंधी लेख अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने डीएसबी परिसर से पढ़ाई के बाद एरीज जैसे केंद्रीय वैज्ञानिक संस्थान में शीर्ष पद पर पहुंचकर नाम कमाया। 

राष्ट्रीय विज्ञान एकादमी के फैलो रहे डॉ. पांडे तरुण वैज्ञानिक पुरस्कार व विक्रम साराभाई अवार्ड से भी सम्मानित हुए। इसके अलावा भी उन्हें कई पुरस्कार प्राप्त हुए।

उनके 150 से अधिक शोध पत्र विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। एरीज के निदेशक दीपांकर बनर्जी, वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडेय समेत एरीज के अन्य वैज्ञानिकों ने भी उनके निधन पर दुख जताया है।
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