डॉ. परवेज के मुताबिक नमी और गंदगी से भी यह संक्रमण हो सकता है। उन्होंने बताया कि खेती-बागवानी के शौक रखने वाले ऐसा करते समय हाथों में ग्लब्ज और पैरों में रबड़ के जूते पहनें। साथ ही कार्य पूरा करते ही इन्हें उतारकर हाथ पैरों समेत पूरे शरीर को ठीक तरह से धोकर साफ कर लें। पुराने मास्क, गीला तौलिया, गीली मिट्टी से भी यह संक्रमण हो सकता है।
उपचार बहुत महंगा और लंबे समय तक है चलता
डॉ. परवेज ने बताया कि ब्लैक फंगस में आंख, कान, जबड़ा, दांत और दिमाग में संक्रमण फैल सकता है। समय पर इलाज न होने से ऑपरेशन की नौबत आ सकती है। इसका उपचार बहुत महंगा और लंबे समय तक चलता है।
शुगर को रखें नियंत्रित
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील कुमार ओझा ने बताया कि उपचार के डेढ़ महीने बाद तक भी शुगर (मधुमेह) पर ध्यान देना चाहिए। इस दौरान शुगर को नियंत्रित रखना जरूरी है। साफ-सफाई का ध्यान रखें और अच्छे तरीके से नहाएं। अगर स्टेरॉयड का इस्तेमाल कर रहे हैं तो जल्द से जल्द अपने डॉक्टर से इस बारे में सलाह लें। डॉक्टर के बताए अनुसार धीरे-धीरे स्टेरॉयड का इस्तेमाल बंद या कम कर दें।
ब्लैक फंगस के लक्षण
-आंखों में सूजन, आंखों के चारों तरफ काली लाइनें, नाक का सूजना, दांतों में दर्द, दिमाग में सूजन, सिर में एक तरफ का दर्द आदि।