इस आबादी में बड़ी संख्या एकाकी बुजुर्गों की भी हैं। उन्हें भोजन, पेंशन, दवा और अन्य जरूरी चीजों के लिए घर से बाहर निकलना पड़ रहा है। रिटायर्ड इंजीनियर योगेंद्र सिंह कहते हैं, कोरोना काल में बुजुर्गों और बच्चों को सलामती के लिए सरकार को कार्ययोजना तैयार करनी होगी।
कुछ ऐसी ही चिंता नौ साल तक के बच्चों को लेकर भी है। प्रदेश में इस आयु वर्ग के 19 लाख 83 हजार 665 बच्चे हैं। बच्चों के मामले में सरकार ने जरूर कुछ ठोस कदम उठाए। मसलन, स्कूल बंद किए। नौ साल से कम आयु के बच्चों वाले सरकारी अधिकारी कर्मचारियों को दफ्तर आने से छूट दी गई। लेकिन गरीब और निचले तबके में बच्चों को संक्रमण से बचाने के उतने गंभीर उपाय नदारद हैं।
60 वर्ष व उससे ऊपर की आयु की आबादी
09 लाख से अधिक 60 व उससे ज्यादा आयु के
6.76 लाख बुजुर्ग राज्य के गांवों में निवास कर रहे
2.24 लाख बुजुर्ग शहरी क्षेत्रों में निवास कर रहे
19.83 लाख नौ वर्ष तक की आयु के बच्चों की आबादी
9.24 लाख की आबादी प्रदेश में चार वर्ष तक के बच्चों की है
10.58 लाख की जनसंख्या पांच से नौ वर्ष की आयु के बच्चों की है
स्रोत: अर्थ एवं संख्या विभाग की सांख्यिकी रिपोर्ट
विश्व स्वास्थ्य संगठन और केंद्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसार, कोविड-19 महामारी में सबसे अधिक संवेदनशील बुजुर्ग और बच्चे हैं। राज्य में कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है। अकेले देहरादून में 250 में से 70 प्रतिशत ऐसे मामले हैं, जिनके संक्रमण का स्रोत नहीं है। जाहिर है कि खतरा उनके लिए बढ़ा है, जो ज्यादा संवेदनशील हैं। इसलिए बच्चों और बुजुर्गों के सुरक्षा चक्र और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
- अनूप नौटियाल, समाजसेवी एवं विश्लेषक