सीएचसी के अधीक्षक डा. एचसी त्रिपाठी ने बताया कि बॉर्डर पर तैनात स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने उन्हें सूचना दी कि बॉर्डर पर जो कंपनी कोरोना जांच कर रही है, उसकी कार्यशैली संदिग्ध है।
उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड आने वाले यात्रियों की कोरोना जांच के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है। जिस कंपनी ने कोरोना जांच का ठेका लिया था, बॉर्डर पर उसके कारिंदे सिर्फ नाक में एक सलाई डालकर जांच कराने वालों को निगेटिव बता दे रहे थे। पुलभट्टा थानाध्यक्ष विनोद जोशी ने बताया कि आठ लोगों को हिरासत में लिया है। मामले की जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज कर लिया जाएगा।
डा. एचसी त्रिपाठी ने बताया कि उन्हें जानकारी दी गई कि यात्रियों की नाक में सलाई डालकर सलाई फेंक दी जाती है और यात्री को निगेटिव रिपोर्ट दे दी जा रही है। बताया कि सूचना पर वे एसडीएम नरेश चंद दुर्गापाल के साथ मौके पर पहुंचे तो वहां 8 मार्च को हरिद्वार में इस्तेमाल की जा चुकी किटें मिली।
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सूचना पर जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी देवेंद्र पंचपाल, एसीएमओ डा. अविनाश खन्ना भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों के अनुसार वहां तैनात आठ कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है। मौके पर सोमवार को 103 लोगों की जांच होना पाया जबकि मात्र 3 लोगों की जांच किट से की गई। बाकी लोगों की नाक में सलाई डालकर उन्हें बताया दिया गया कि उनकी रिपोर्ट निगेटिव है। डा. एचसी त्रिपाठी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ तहरीर देने की तैयारी की जा रही है।
103 की जांच की, स्टिक मिली सिर्फ तीन
बताया जा रहा है कि इस कंपनी ने 27 मई से पुलभटटा बॉर्डर पर जांच शुरू की थी। सोमवार दिन में यहां पर 103 लोगों की कोरोना जांच की गई जबकि मौके से सिर्फ तीन स्टिक एंटीजन की इस्तेमाल हुई मिली हैं। यहां पर हरिद्वार में 8 मार्च को प्रयोग की गई स्टिक काफी मात्रा में मिली हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि कंपनी के कर्मचारी सिर्फ नाक में सलाई डालकर अपने अभिलेखों में जांच निगेटिव लिख देते हैं। हरिद्वार की किटें दिखावे के लिए वहां रखी गई हैं।