राज्य सरकार बेशक तीसरी लहर की पूरी तैयारी की बात कर रही है। लेकिन जानकारों का मानना है कि 18 वर्ष की आयु से कम बच्चों की कुल आबादी के 10 फीसदी भी संक्रमित हुए तो ऑक्सीजन और आईसीयू बेड कम पड़ जाएंगे। इस मामले में उच्च न्यायालय में राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान ने जनहित याचिका भी दायर की है। जुगरान के मुताबिक, 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में 18 साल से कम आयु के करीब 38 लाख बच्चे हैं।
तीसरी लहर में यदि इनमें से 10 प्रतिशत बच्चे संक्रमित होते हैं तो इनमें से पांच प्रतिशत के लिए 19000 ऑक्सीजन बेड की जरूरत होगी। लेकिन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अस्पतालों में अभी 6059 ऑक्सीजन बेड हैं। इसी तरह कुल 10 फीसदी आबादी के एक प्रतिशत 3800 बच्चों को आईसीयू बेड की जरूरत पड़ी तो सरकार के स्तर पर वो भी पूरे नहीं हो पाएंगे क्योंकि अभी तक सरकार 1429 आईसीयू बेड का इंतजाम कर पाई है।
तीसरी लहर के ये तीन रामबाण
सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल के मुताबिक, अस्पतालों में सीमित इंतजामों को देखते हुए तीसरी लहर से बचाव के तीन रामबाण है। पहला सामाजिक दूरी व मास्क पहनने की आदत को कड़ाई से लागू कराना होगा। दूसरा, ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण और तीसरा ज्यादा से ज्यादा कोरोना की जांच करानी होगी।
तैयारियों में मददगार हो सकती है मॉक ड्रिल
तीसरी लहर की तैयारियों के लिए राज्य सरकार के पास काफी समय है। जानकारों का मानना है कि सरकार को समय-समय पर अपनी तैयारियों को परखने के लिए मॉक ड्रिल करनी चाहिए। यह पूर्वाभ्यास उन कमियों को दूर करने में मदद कर सकता है जो तीसरी लहर में संकट बढ़ा सकती हैं। हरिद्वार महाकुंभ में सरकार ने मॉक ड्रिल करने में देरी कर दी थी।
तीसरी लहर को लेकर सरकार पूरी तरह से चौकन्नी है। सरकार इसकी लगातार तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री तैयारियों की लगातार समीक्षा और मॉनिटरिंग कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में अस्पतालों में संसाधनों का काफी विस्तार हुआ है। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं।
- सुबोध उनियाल, शासकीय प्रवक्ता, उत्तराखंड सरकार