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Lockdown: देहरादून आने हैं साढ़े 15 हजार प्रवासी, प्रशासन के सामने हैं ये चार बड़ी चुनौती

Thu, 14 May 2020 08:50 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर देहरादून आने के लिए 15,628 लोगों ने किया है आवेदन
  • अभी तक 4,536 को मिली मंजूरी, 10,492 लोगों को अनुमति का इंतजार
  • दून में अभी तक केवल 20 क्वारंटीन सेंटर्स, कोरोना संक्रमण होने पर इंतजाम भी कम
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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लॉकडाउन के बीच घर लौटने की उम्मीद में 15628 लोगों ने आवेदन कर दिया। इनमें से 4536 लोगों का आवेदन स्वीकार भी कर लिया गया है। 10492 लोगों को अनुमति का इंतजार है, लेकिन इस आगमन में चुनौतियां भी अपार हैं।

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लोगों की जांच से लेकर उन्हें क्वारंटीन करने तक और उनके अस्पताल में इलाज तक चुनौतियां ही चुनौतियां हैं। हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि नई गाइडलाइंस के हिसाब से वह इस चुनौती से निपटने को तैयार हैं।

  • चुनौती 1-  20 क्वारंटीन सेंटर्स में 1563 बेड
    दून पहुंचने वाले लोगों की अर्जियों को देखें तो ऐसे प्रवासियों की संख्या बड़ी है। इनकी तुलना में क्वारंटीन सेंटरों की संख्या बहुत कम है। जिले की बात करें तो यहां पर फिलवक्त 20 क्वारंटीन सेंटर हैं। जिनमें धर्मशालाएं और होटल भी शामिल हैं। इन सभी सेंटरों में महज 1563 बेड ही उपलब्ध हैं। जबकि बड़ी संख्या में हर रोज प्रवासी पहुंच रहे हैं। जितने लोग कतार में हैं, उन्हें अनुमति मिलने के हालात में चुनौतियां बढ़नी लाजिमी हैं। बाहर से आने वाले सभी लोगों को इन क्वारंटीन सेंटर में 14 दिन की अवधि तक रखना संभव नहीं है। अभी कई सेंटरों में 90 लोग क्वारंटीन है। कोरोना के जिला नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश चौहान ने बताया कि क्वारंटीन सेंटर में कोरोना संदिग्ध मरीजों को रखा जाता है। जरूरत के हिसाब से बेड भी तैयार किए जा रहे हैं।
  • चुनौती 2-    होम क्वारंटीन में निगरानी
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    केंद्र सरकार की कोरोना लॉकडाउन से जुड़ी गाइडलाइंस के हिसाब से जिला प्रशासन ने बाहर से आने वाले लोगों को होम क्वारंटीन करने का काम शुरू किया है। रोजाना लोग आ रहे हैं और उन्हें होम क्वारंटीन भी किया जा रहा है। अब यहां सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को होम क्वारंटीन करने के बाद इनकी निगरानी कैसे होगी। दरअसल, पुलिस या स्वास्थ्य महकमे के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि हर होम क्वारंटीन किए गए व्यक्ति की पूरी निगरानी की जा सके। हालांकि इस चुनौती से निपटने के लिए मोबाइल ऐप का सहारा लिया जा रहा है।
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ये भी हैं परेशानी

  • चुनौती 3  400 मरीजों को मिल सकता है कोरोना का इलाज
    दून अस्पताल में 35 आईसीयू बेड हैं। तीन बाईपैप मशीनें हैं, जिनकी मदद से जरूरत पड़ने पर मरीज को ऑक्सीजन फेफड़ों तक पहुंचाई जाती है। यहां कुल 500 बेड का अस्पताल है, जिसमें से 400 बेड कोरोना के लिए रिजर्व किए गए हैं। यानी एक बार में कोरोना के 400 मरीजों को एक साथ इलाज दिया जा सकता है। हजारों की संख्या होने पर इलाज की चुनौती तैयार है। हालांकि दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना का कहना है कि दून अस्पताल में कोरोना के मद्देनजर पोर्टेबल एक्सरे, इको मशीनें भी लाई गई हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल इतने लोगों का इलाज देने की पूरी व्यवस्था उपलब्ध है।
  • चुनौती 4दून अस्पताल में रोजाना 90 सैंपल की ही जांच
    दून अस्पताल में कोरोना की जांच शुरू हो चुकी है। यहां कोरोना की जो लैब बनाई गई है, उसमें रोजाना 90 सैंपल की जांच की जा रही है। रैंडम सहित विभिन्न माध्यमों से रोजाना करीब 175 सैंपल आ रहे हैं। यानी प्रतिदिन करीब आधे सैंपल पेंडिंग हो रहे हैं। लोगों की संख्या बढ़ने के बाद अगर सैंपलिंग में इजाफा किया जाता है तो लंबित जांचों की संख्या भी बढ़ जाएगी।

जितने भी प्रवासी उत्तराखंडी आएंगे, उन्हें होम क्वारंटीन में रखा जाएगा। अगर कोई कोरोना पॉजिटिव है, केवल उसी को अस्पताल या संस्थागत क्वारंटीन किया जाएगा। प्रशासन की पूरी व्यवस्था है। प्रवासियों को लेकर पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं। किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी।
डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव, जिलाधिकारी
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