उत्तराखंड में कोरोनाकाल की दूसरी लहर में यदि जेल में संक्रमण ने पैर पसारे तो कई बंदी-कैदियों की जान जोखिम में पड़ सकती है। मौजूदा समय में जेल में एक हजार से ज्याद बंदी-कैदी निरुद्ध हैं, जबकि जेल में क्षमता के अनुसार बैरक नहीं बनी है। ऐसे में अब बंदी और कैदियों को संक्रमण का डर सता रहा है। जिसके बाद जेल मुख्यालय के अधिकारियों ने रिहा किए जाने वाले बंदियों की सूची तैयार की है। प्रदेश की आठ जेलों से 46 बंदियों को छोड़ा जाएगा।
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कोराना संक्रमण की दूसरी लहर ने तबाही मचा रखी है। रोजाना संक्रमण की चपेट में आकर लोग काल के गाल में समा रहे हैं। ऐसे में प्रदेश की जेलों में रोजाना आरोपियों की संख्या भी बढ़ रही है। पुलिस रोजाना किसी न किसी मामले में आरोपियों को जेल भेज रही है। जिसके चलते जेलों में भी क्षमता से ज्यादा बंदी बंद हैं। ऐसे में जेलों में संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। जिसके चलते अब कारागार मुख्यालय से बंदियों की सूची जारी की गई है। इन बंदियों को 90 दिन की पैरोल पर छोड़ा जाएगा। इसके बाद इन्हें फिर से वापस जेल में अपनी आमद करानी होगी। यदि पैरोल का समय खत्म होने के बाद कोई बंदी वापस नहीं आता तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
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घरों पर छोड़ने जाएंगे सिपाही
पैरोल पर रिहा किए जाने वाले बंदियों को उनके घरों पर छोड़ने के लिए पुलिसकर्मी जाएंगे। इसके लिए जेेल प्रशासन ने डीएम और एसएसपी को पत्र खिलकर सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराने की मांग की है। सुरक्षाकर्मी मिलते ही बंदियों को भेज दिया जाएगा।
अलग होते हैं क्वारंटीन
जेल अधीक्षक शिवमूरत सिंह ने बताया कि जेल में क्षमता से अधिक बंदी व कैदी हैं। हालांकि जेल में लाने से पहले संक्रमण के खतरे को देखते हुए इन बंदियों को 14 दिन के लिए अलग से क्वारंटीन किया जाता है।
यहां से होंगे रिहा
हरिद्वार- 5
देहरादून- 6
पौड़ी- 3
टिहरी- 8
चमौली- 1
नैनीताल- 1
अल्मोडा- 7
हल्द्वानी- 15
संक्रमण जेल में पैर न पसारे इसके लिए हरिद्वार से पांच जबकि अन्य जेलों से कुल 46 बंदियों को छोड़ जाएगा। सात साल से कम सजा पाने वाले बंदियों को ही 90 दिन की पैरोल पर छोड़ा जा रहा है। हत्या, दुष्कर्म व डकैती जैसे गंभीर मामलों में सजा काट रहे कैदियों को पैरोल की श्रेणी में नहीं रखा गया है।
- शिव मूरत सिंह, जेल अधीक्षक हरिद्वार।