प्रदेेश में कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार काबू में आ गई है। सात जिलों में संक्रमण दर पांच प्रतिशत से कम होने के साथ ही बीते दो दिनों से देहरादून और हरिद्वार जिले को छोड़ कर बाकी जिलों में प्रतिदिन सौ से कम संक्रमित मामले मिल रहे हैं।
कोविड काल में अब तक संक्रमितों का आंकड़ा 3.33 लाख पहुंच गया है। इसमें तीन लाख से ज्यादा मरीजों ने कोरोना को मात दी है। संक्रमित मामले घटने से स्थिति काबू में हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के दो जून तक के आंकड़ों के आधार पर उत्तरकाशी, टिहरी, देहरादून, बागेश्वर, चंपावत, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिले में संक्रमण दर पांच प्रतिशत से कम है।
जबकि छह जिलों में 5 से 10 प्रतिशत के बीच संक्रमण दर है। बीते दो दिन से देहरादून व हरिद्वार को छोड़ कर बाकी जिलों में प्रतिदिन 100 से कम संक्रमित मिले हैं। वहीं, संक्रमितों की तुलना में ठीक होने वालों की संख्या ज्यादा होने से रिकवरी दर में इजाफा हो रहा है। वर्तमान में प्रदेश की रिकवरी दर 90 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
सचिव स्वास्थ्य डॉ. पंकज कुमार पांडेय का कहना है कि अभी कोरोना संक्रमण का खतरा कम नहीं हुआ है लेकिन संक्रमण की रोकथाम और ठीक होने वाले मरीजों की दर में सुधार हुआ है। संक्रमित मामले कम होने के साथ ही रिकवरी दर और मृत्यु दर में सुधार हो रहा है।
प्रदेश में पांच प्रतिशत से कम संक्रमण दर वाले जनपद
जिला - संक्रमण दर प्रतिशत में
उत्तरकाशी - 4.62
टिहरी - 4.16
देहरादून - 3.96
बागेश्वर - 3.45
चंपावत - 3.40
हरिद्वार - 2.35
ऊधमसिंह नगर - 2.28
कैंची मंदिर में भक्तों के प्रवेश पर लगी रोक
कोरोना के संक्रमण को देखते हुए अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित कैंची में नीब करौरी बाबा के मंदिर के गेट शनिवार को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने मंदिर में लगातार श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर के मुख्य गेट बंद करने का फैसला लिया। शनिवार को मंदिर समिति ने मुख्य गेट पर रस्सी लगाकर गेट को बंद कर दिया गया है।
मंदिर प्रबंधक विनोद जोशी ने बताया कि कोरोना संक्रमण का खतरा हर दिन बढ़ने के साथ मंदिर में बाबा के भक्तों की संख्या भी बढ़ने लगी थी। सरकार ने आवाजाही पर कोई रोक नहीं लगाई है, इसके चलते बाहरी राज्यों से भी भक्त दर्शनों के लिए लगातार पहुंच रहे थे। फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद किए गए हैं। शनिवार को मंदिर के गेट बंद होने से बाबा के भक्त मंदिर के बाहर से ही हाथ जोड़कर लौट गए।