कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए मसूरी एसडीएम मनीष कुमार ने शहर के विभिन्न सगंठनों के साथ बैठक कर चर्चा की और लोगों से सुझाव मांगे। बैठक में शहर को शत प्रतिशत वैक्सीनेशन कराने का लक्ष्य रखा गया। साथ ही लक्ष्य जल्द पूरा करने के लिए सभी से सहयोग की अपील की।
एसडीएम कार्यालय में हुई बैठक में मसूरी ट्रेडर्स एसोसिएशन ने शहर में एक जुलाई तक 99 प्रतिशत वैक्सीनेशन कराने की बात रखी। एसडीएम मनीष कुमार ने सभी लोगों से वैक्सीन लगवाने की अपील की। एसडीएम ने कहा कि पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध है। कहा कि शहर में लगातार सैलानियों की संख्या बढ़ रही है। इसे देखते हुए शहर के सभी लोगों का वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर से निपटने के लिए संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा। बैठक में निर्णय लिया गया है कि प्रशासन और मसूरी ट्रेडर्स संयुक्त रूप से लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करेंग। शहर में टीकाकरण के लिए कई जगह शिविर लगाए जाएंगे। इसके अलावा माल रोड पर बिना मास्क के घूमने वालों पर सख्ती करने और सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लघंन करने पर चालान करने पर जोर दिया गया।
साथ ही शहर के बंद पर्यटक स्थलों को गाइडलाइन के अनुसार खुलवाने पर चर्चा की गई। बैठक में उत्तराखंड होटल एसोसिएशन अध्यक्ष संदीप साहनी, मसूरी ट्रेडर्स अध्यक्ष रजत अग्रवाल, जगजीत कुकरेजा, नागेंद्र उनियाल, शहर कोतवाल राजीव रौथाण, संजय अग्रवाल, देवी गोदियाल, सलीम अहमद, आरएन माथुर सहित विभिन्न सगंठनों से जुड़े लोग मौजूद रहे।
उत्तराखंड में होने वाली मौतों में सिर्फ 8.9 प्रतिशत मामलों में मृत्यु का कारण पता चल रहा है। केंद्र सरकार के सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की 2019 रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। मृत्यु का मेडिकल प्रमाण पत्र के लिए 2019 में उत्तराखंड में कुल 95.6 प्रतिशत मौतें पंजीकरण की गई। जिसमें 8.9 प्रतिशत में ही मौत के कारणों का पता लगा है।
केंद्र सरकार के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना उपायुक्त कार्यालय की ओर से सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के तहत वर्ष 2019 की मृत्यु के कारण का मेडिकल प्रमाण पत्र(एमसीसीडी) की रिपोर्ट जारी की गई। जिसमें खुलासा हुआ कि उत्तराखंड में 2019 में 95.6 प्रतिशत मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए पंजीकरण किया गया। इसमें सिर्फ 8.9 प्रतिशत मेडिकल प्रमाण पत्र में मौत का कारण बताया गया। जबकि गोवा में शत प्रतिशत मौतों का पंजीकरण कर कारणों को बताया गया। लेकिन 36 राज्य व केंद्र शासित राज्यों में उत्तराखंड 32 वें स्थान पर है।
सोशल डेवलपमेंट फार कम्युनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल का कहना है कि केंद्र सरकार के सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम ने हाल में सभी राज्यों की मौत का मेडिकल प्रमाण पत्र की रिपोर्ट जारी की है। अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश में 95.6 प्रतिशत मृत्यु प्रमाण के लिए पंजीकरण किया गया। लेकिन 8.9 प्रतिशत मौतों में ही मृत्यु कारण पता लगा है। नौटियाल ने कहा कि सरकार को नीति बनाने में आंकड़ों को महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिसके आधार पर सरकार नीति व योजनाएं तैयार करती है। लेकिन जब मौत के कारणों का सही वजह ही पता नहीं होगा। तो स्वास्थ्य सेवाओं में किस तरह से सुधार किया जा सकता है।