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भारत-चीन सीमा: जोशीमठ-मलारी हाईवे पर 11वें दिन शुरू हुई वाहनों की आवाजाही, आईटीबीपी और सेना को मिली राहत

Thu, 24 Jun 2021 06:42 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ

सार

बता दें कि 14 जून को रैणी गांव के निचले क्षेत्र में करीब 40 मीटर मलारी हाईवे ध्वस्त होकर धौली गंगा में समा गया था।
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जोशीमठ-मलारी हाईवे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले जोशीमठ-मलारी हाईवे पर बृहस्पतिवार को 11वें दिन वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई। हाईवे खुलने पर नीती घाटी के 14 गांव की दो हजार की आबादी ने राहत की सांस ली है। चीन सीमा क्षेत्र में मुस्तैद आईटीबीपी और सेना के जवानों की दिक्कतें भी दूर हो गई हैं।

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रैणी गांव के निचले क्षेत्र में 14 जून को मलारी हाईवे करीब 40 मीटर ध्वस्त होकर धौली गंगा में समा गया था। यहां पैदल आवाजाही के लिए भी रास्ता नहीं बचने से सेना की मुश्किल बढ़ गई थी। ऐसे में नई सड़क बनाने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के पास रैणी गांव के निचले हिस्से में पहाड़ काटने का ही विकल्प था। लेकिन ग्रामीण पुनर्वास और मुआवजा की मांग पर अड़े हुए थे।

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बदरीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट ने रैणी गांव पहुंचकर लोगों को मुआवजे और पुनर्वास का आश्वासन दिया था। ग्रामीणों की सहमति के बाद ही सड़क का काम शुरू हो पाया था। बीआरओ के कमांडर मनीष कपिल ने बताया कि सड़क पर सुरक्षा के भी इंतजाम कर दिए गए हैं। अब यहां सेना, आईटीबीपी और स्थानीय लोगों की आवाजाही सुचारू हो गई है।

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नमक, तेल लेने के लिए तय करनी पड़ रही 60 किलोमीटर की दूरी

सोल घाटी की लाइफ लाइन कही जाने वाली थराली-डुंगरी-घाट सड़क 15 दिनों से बंद होने के कारण गांवों में राशन की किल्लत होने लगी है। स्थिति यह है कि ग्रामीणों को नमक, तेल सहित जरूरी सामान के लिए 60 किमी की दूरी नापनी पड़ रही है। 

क्षेत्र के रमेश, जयबीर, सुरेश व बीरेंद्र ने कहा कि गांवों में स्थित दुकानों में भी सामान समाप्त हो गया है। साथ ही बीमार और गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंच पा रही हैं। कहा कि सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि घोड़े-खच्चर भी नहीं जा पा रहे हैं। लोग किसी तरह चट्टानों और खाई से होते हुए 30 किमी की दूरी तय कर थराली बाजार पहुंच रहे हैं और लौटते समय भी 30 किमी की ही दूरी तय करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द सड़क नहीं खुली तो क्षेत्र में खाद्यान्न संकट हो सकता है। उन्होंने पीएमजीएसवाई से जल्द सड़क खोलने की मांग की। 

वहीं आदिबदरी में सुगडबैंड-सिलपाटा मोटर मार्ग पर मलबा आने के कारण पांच दिनों से यातायात ठप है। सड़क बंद होने से छिमटा, सिलपाटा, प्यूंरा, पज्याणा, लंगटाई सहित 10 गांवों के लोगों को आदिबदरी आने के लिए 9 किलोमीटर का पैदल सफर करना पड़ रहा है। वहीं पीएमजीएसवाई के एई सचिन कुमार का कहना है कि प्यूंरा के पास सड़क का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। जेसीबी लगातार मलबा मार्ग खोलने के प्रयास जारी है।
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