पिछले 16 दिनों से बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल पर होने के कारण सचिवालय के अनुभागों पर काम का बोझ पड़ा है। अनुभागों की टेबलों पर फाइलों के ढेर लग गए हैं। सबसे अधिक दबाव 25 मार्च से शुरू हुए रहे बजट सत्र से संबंधित सूचनाएं तैयार करने का है।
इसके अलावा कई अहम मामलों में विभागों को अदालतों में हलफनामा दाखिल करने हैं। कुछ मामलों में अदालत की अवमानना का खतरा है। यही वजह है कि अनुभागों में अदालत से जुड़े मसलों को निपटाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को काम में जुटना पड़ा।
मास्क लगाकर दफ्तरों में निपटाया कामकाज
सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोरोना के संक्रमण का भय साफ नजर आया। एहतियात बरतने के लिए वे मास्क लगाकर दफ्तरों में पहुंचे। उन्होंने मुंह पर मास्क लगाकर ही कामकाज निपटाया।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए सचिवालय कर्मियों को 25 मार्च तक घर से काम करने के आदेश पर राजभवन की मुहर लग गई है। बृहस्पतिवार को राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने इसका आदेश जारी कर दिया। बुधवार को मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने आदेश जारी कर अधिकारियों/ कर्मचारियों से कहा था कि वे 25 मार्च तक घर पर रहकर ही काम करेें।
उच्च अधिकारियों से कहा गया है कि बहुत जरूरी काम होने पर ही किसी कर्मी को सचिवालय बुलाया जाए। मुख्य सचिव उत्पल कुमार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक दुनिया भर के विशेषज्ञों ने इस संक्रमण को रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग की सलाह दी है।
इसी के तहत सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, प्रभारी सचिव, मंडलायुक्त, जिलाधिकारियों आदि को आदेश दिया गया है कि वे बहुत जरूरी काम होने पर ही कर्मचारियों को बुलाएं। कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी जाए।
सभी कार्मिक दूरभाष पर उपलब्ध रहेंगे और बुलाए जाने पर कार्यालय आएंगे। इसमें स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, परिवहन, खाद्य आपूर्ति, पेयजल, विद्युत, सफाई आदि महकमों को अति आवश्यक सेवाओं के तहत मानते हुए इसमें छूट दी गई है।
सचिवालय पर नजर आया असर
मुख्य सचिव के आदेश का ही असर था कि बृहस्पतिवार को सचिवालय में आधे अनुभागों में ताले लटक गए। बाकी के अनुभागों में भी बेहद कम कर्मी मौजूद रहे। विश्वकर्मा भवन में भी कर्मियों की मौजूदगी बेहद कम थी। कई अनुभागों में कर्मचारी विधानसभा सत्र से संबंधित काम को निपटाने के लिए पहुंचे। सचिवालय के अंदर की तीनों कैंटीन भी बंद रहीं।