कोरोना काल के एक साल में सरकार ने कोविड की आरटीपीसीआर जांच के लिए आठ सरकारी लैब स्थापित की है। इससे पहले प्रदेश में एक भी लैब नहीं थी। कोरोना संक्रमण बढ़ने से सरकार को सैंपलिंग बढ़ाने के लिए पहाड़ों में भी लैब बढ़ानी होनी होगी। अभी तक पर्वतीय क्षेत्रों में जिला स्तर पर आरटीपीसीआर सैंपल जांच की सुविधा नहीं है।
स्वास्थ्य सुविधा - संख्या
आईसोलेशन बेड - 31505
ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड - 3535
आईसीयू बेड - 836
वेंटिलेटर - 695
ऑक्सीजन सिलिंडर - 9917
ऑक्सीजन कॉनसेंट्रेटर - 1275
एंबुलेंस - 364
कोरोना को काबू करने के लिए बढ़ने लगीं बंदिशें
प्रदेश में कोरोना को काबू करने के लिए फिर से बंदिशें भी बढ़ने लगी हैं। एक सप्ताह के भीतर देहरादून और हरिद्वार जिले में नौ कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं। सरकार की ओर से सभी जिलों को कोविड नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। वहीं, शासन ने संक्रमण की रोकथाम के लिए सूक्ष्म कंटेनमेंट जोन बनाने पर जोर दिया है।
प्रदेश में 20 मार्च के बाद कोरोना संक्रमण में तेजी आई है। अब रोजाना तीन से चार सौ से अधिक संक्रमित मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना काबू करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार ने फिर से कंटेनमेंट जोन बनाने पर जोर दिया हैं।
27 मार्च को देहरादून जिले के मसूरी में एक कंटेनमेंट जोन बनाया गया था, लेकिन लगातार बढ़ रहे संक्रमितों की संख्या को देखते हुए देहरादून जिले में आठ कंटेनमेंट जोन बनाए गए। जबकि हरिद्वार जिले में एक कंटेनमेंट जोन बनाया गया है। कंटेनमेंट जोन में आवश्यक सेवाओं को छोड़ कर बाकी सभी तरह की गतिविधियां प्रतिबंधित हैं।