भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत व उनके बेटे की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन सभी लोगों में चिंता है जो उनके गृह प्रवेश की पार्टी में शामिल हुए थे।
भगत ने 21 अगस्त को यमुना कालोनी स्थित सरकारी आवास में गृह प्रवेश पर सहभोज का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में उनके बेटे भी थे। हालांकि कहा जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया था। सभी अतिथि आयोजन में मास्क लगाकर पहुंचे थे।
कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सरकार के कुछ मंत्री और पत्रकार भी मौजूद थे। इतना ही नहीं राष्ट्रीय महामंत्री संगठन शिव प्रकाश और प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार, पार्टी के प्रदेश महामंत्री, प्रदेश मीडिया प्रभारी व कई अन्य नेताओं ने कार्यक्रम में शिरकत की थी।
इसके बाद भगत ने 24 अगस्त को मीडिया कर्मियों को सहभोज के लिए आमंत्रित किया था। इसी आयोजन के दौरान उन्होंने विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन की पार्टी में वापसी कराई थी।
नाबालिग से छेड़छाड़ करने वाला कथित डॉक्टर कोरोना संक्रमित पाया गया है। पुलिस के अनुसार उसे पूरे एहतियात के साथ गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद कोर्ट ले जाने से पहले हुए रैपिड टेस्ट में संक्रमित होने की पुष्टि हुई। कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है, जहां उसे आईसोलेशन सेंटर में रखा गया है।
आरोपी के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि सीओ मसूरी नरेंद्र पंत ने की है। गौरतलब है कि बृहस्पतिवार को प्रेमनगर क्षेत्र में एक किशोरी अपने भाई के साथ दवाई लेने गई थी। वहां से उसका भाई तो सामान लेने के लिए चला गया, लेकिन वह मेडिकल स्टोर में अंदर चली गई।
वहां लगभग 70 वर्षीय बुजुर्ग, जो अपने बेटे के मेडिकल स्टोर पर खुद को डॉक्टर बताता था, ने किशोरी से छेड़छाड़ की। किशोरी ने यह बात अपने भाई को और उसने परिजनों को बताई। परिजनों की शिकायत पर बुजुर्ग के खिलाफ पोक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था।
कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह है कि अगर उनमें कोरोना के लक्षण नहीं है या कोरोना का संक्रमण कम है तो वह हॉस्पिटल फोबिया से बचने के लिए अस्पताल जाने के बजाय सरकार द्वारा बनाए गए कोविड केयर सेंटर में भर्ती होने को प्राथमिकता दें।
इससे जहां अनावश्यक अस्पताल में होने वाला दबाव कम हो सकेगा। वहीं, कोविड केयर सेंटर में उन्हें बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध की जा रही हैं। जिस तरह से समय बढ़ता जा रहा है जिले में कोरोना मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ती जा रही है।
शहर के एकमात्र सबसे बड़े कोविड अस्पताल में तब्दील किए गए एकमात्र राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में बड़ी संख्या में एंटीजन टेस्ट और आरटीएफसीआर टेस्ट होने की वजह से मरीजों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। परेशान मरीज दून अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।
जबकि अब दून अस्पताल की क्षमता भी जवाब देने लगी है। इससे गंभीर मरीजों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। एक बात यह भी सामने आई है कि अस्पताल में रहकर मरीज ज्यादा परेशानी महसूस कर रहे हैं।
टैगोर विला स्थित मनोरोग क्लीनिक के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. नंदकिशोर ने बताया कि डॉक्टर या अस्पताल को लेकर सामान्य तौर पर भी मानसिक रूप से इंसान के दिमाग में कई बार उलझन की स्थिति हो जाती है। कोरोना होने पर यह और परेशान कर सकता है। ऐसे में सरकार द्वारा बनाए गए कोविड केयर सेंटर जहां पर डॉक्टरों की तैनाती भी है, वहां पर भर्ती होना चाहिए। निश्चित तौर पर हॉस्पिटल फोबिया से बचते हुए उन्हें वहां पर सुकून भी महसूस होगा।