विद्वेष की राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण : हरीश रावत
पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड छोटा राज्य है। हमारे राज्य में जातीय, धार्मिक, भाषाई, क्षेत्रीय व सांस्कृतिक आदि किसी भी विद्वेष के लिए कोई स्थान नहीं है। यदि विद्वेष की राजनीति आगे बढ़ेगी तो यह राज्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा। उत्तराखंड की राजनीति के अपने तरीके के किरदार हैं। हमें अपने आपको उनके कुछ उटपटांग खासियतों के साथ समायोजित होना सीखना पड़ेगा। अनुभव के आधार पर मैं सभी को सावधान करना चाहता हूं कि हम विद्वेषपूर्ण के बजाय स्वस्थ, परिश्रम आधारित प्रतिस्पर्धी राजनीति को अपनाएं और आगे बढ़े।
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चैंपियन को पता नहीं होता क्या बोलना है : हरक
कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने भी चैंपियन के आरोपों पर पलटवार किया। कहा, मैं ही जानता हूं कि 2007 से 2012 में चैंपियन को किस तरह से झेला है। नेतागिरि शिव की बारात की तरह है, जहां अलग-अलग तरह के लोग होते हैं। 2012 में जैनी प्रकरण के बाद मैं सबसे ज्यादा वोटों से चुनाव जीता। यदि मैंने कोई गलती की होती तो प्रदेश की जनता मुझे चुनाव नहीं जिताती। समाज कभी चैंपियन को गंभीरता से नहीं लेता है।