लोगों की जान का दुश्मन बने जंगली हाथी को आखिरकार राजाजी टाइगर रिजर्व और वन विभाग के अधिकारियों ने करीब 12 घंटे ऑपरेशन करने के बाद काबू में कर लिया। इस काम में राधा और रंगीली का साथ न मिलता तो काम आसान नहीं होता।
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हमलावर हाथी को ट्रैंकुलाइजर करके पकड़ा गया। हाथी को काबू करने में अधिकारियों को चीला रेंज के दो पालतू हथिनियों की मदद लेनी पड़ी। हाथी को बेहोश करके चीला रेंज के घने जंगलों में छोड़ दिया है। उन्मादी हाथी के काबू में आने के बाद भेल और शहर के लोगों ने राहत की सांस ली है।
जंगली हाथी एक सप्ताह के भीतर टिबड़ी और भेल में दो लोगों की जान ले चुका था। क्षेत्र में हाथी के लगातार बढ़ते हमले में बाद राजाजी टाइगर रिजर्व और वन विभाग के अधिकारियों ने हमलावर हाथी को पकड़ने की योजना बनाई।
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सौ से अधिक वनकर्मियों की बनी टीम
हरिद्वार में हमलावर हाथी को क्रैन से बांधता राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क का कर्मचारी।
- फोटो : amar ujala
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन और प्रभागीय वनाधिकारी आकाश वर्मा की अगुवाई में टीम गठित कर हाथी को पकड़ने को कहा। बृहस्पतिवार देर शाम को चीला से दो पालतू हाथी और सौ से अधिक वनकर्मियों की टीम ने कार्रवाई शुरू की।
अधिकारी और कर्मचारियों का दल बृहस्पतिवार रात को भेल और आसपास के जंगलों हाथी की तलाश करता रहा। आधी रात तक हमलावर हाथी कहीं नजर नहीं आया। आधी रात के बाद हाथी को टिबड़ी के पास देखा गया। वनकर्मियों ने हाथी को बेहोश करने के लिए ट्रैंकुलाइज किया।
हाथी हल्का बेहोशी की हालात में घने जंगल में भाग गया। हाथी के गायब होने से अधिकारियों और कर्मचारियों के सामने मुसीबत खड़ी हो गई। हाथी को जंगल अंदर ढूंढने के लिए टाइगर रिजर्व को अपने स्निफर डॉग (प्रशिक्षित कुत्ते) की मदद लेनी पड़ी।
स्निफर डॉग ने कई घंटे की मशक्कत के बाद शुक्रवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे हाथी को ढूंढ निकाला। यहां से हाथी को चीला रेंज की पालतू हथिनी रंगीली और राधा की मदद से हिल बाईपास तक लाया गया। यहां से क्रेन की मदद से ट्रक में लादकर चीला रेंज के जंगलों में ले जाया गया।
बिलकेश्वर कालोनी से लेकर भेल तक पूरी रात खाक छानते रहे अफसर
थी को बेहोश करने के बाद जंगल से बाहर की ओर धकेलती पालतू हथिनियां।
- फोटो : amar ujala
हाथी को पकड़ने के लिए राजाजी टाइगर रिजर्व और वन विभाग के अफसरों की अगुवाई में कर्मचारी पूरी रात भेल से लेकर टिबड़ी तक खाक छानते रहे। अफसरों और कर्मचारियों को उसे ढूंढने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। रात के अंधेरे में हमले का डर सता रहा था। अधिकारियों और कर्मचारियों ने जान की परवाह किए बिना सर्च लाइट की मदद से उसे ढूंढ निकाला।
मार्शल ने पहुंचाया हाथी तक
ट्रैंकुलाइज करने के बाद जंगल की ओर भागे हाथी को ढूंढना मुश्किल हो गया था। निदेशक सनातन ने मौके पर डॉग स्क्वायड को बुलाया। स्क्वायड में शामिल मार्शल नाम के डॉक ने तीन किमी दूर घने जंगल के अंदर अधिकारियों और कर्मचारियों को हाथी तक पहुंचाया।
टस्कर हाथी को बेहोश करने के बाद उसके पैरों को बांधते राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के कर्मचारी।
- फोटो : amar ujala
भारी भरकम टस्कर को काबू करने में वन विभाग की हथिनियों राधा और रंगीली को भी एकबारगी पसीने छूट गए। दोनों ने एकजुटता दिखाते टस्कर को न सिर्फ घने जंगलों के बीच से हिल बाइपास तक लाई वरन उसे काबू करने में कर्मचारियों की मदद की। टैंकुलाइज करके हाथी बस इतना बेहोश होता है कि वह झूमता रहता है, गिरता नहीं। दोनों हथिनियां उसे पिछले और अगल-बगल से धकियाते हुए जंगल के रास्ते से सड़क तक लाई। इस दौरान वन कर्मी शोर करने के साथ हवा में फायर भी करते रहे।
हिल बायपास पर उमड़ा लोगों का हुजूूम
हाथी को पकड़ने को लेकर चलाए गए अभियान के दौरान हिल बाईपास पर कई घंटे यातायात बाधित रहा। जैसे ही सूचना मिली कि हाथी काबू में आ गया उसे देखने के लिए बड़ी संख्या में शहर से लोग हिल बाईपास पहुंच गए। भीड़ को नियंत्रित करने में अफसरों, कर्मचारियोँ और पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी।
जानलेवा हमला करने वाले हाथी को 12 घंटे के आपरेशन के बाद पकड़ लिया गया है। पकड़े गए हाथी की उम्र 20 साल के आसपास है। हाथी इतना हमलावर क्यों हो गया था यह जांच का विषय है। चीला रेंज के जंगलों में छोड़ने के बाद भी उसकी निगरानी की जा रही है। - सनातन सोनकर, निदेशक , राजाजी टाइगर रिजर्व