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अब कटेंगे प्रधानपतियों के ‘पर’

Sat, 15 Nov 2014 01:04 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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पंचायतों में निर्वाचित पत्नियों की जगह खुद को प्रतिनिधि बताने वाले पतियों पर शिकंजा कसा जाएगा।
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शासन ने जारी किए आदेश
मुख्य सचिव एन रविशंकर ने सभी विभागों को आदेश जारी कर साफ कर दिया है कि ऐसे प्रधानपतियों समेत इनका सहयोग करने वाले सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।

प्रदेश की पंचायतों में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण व्यवस्था लागू है। इस बार 52,913 महिला पंचायत प्रतिनिधि निर्वाचित हुईं और यह कुल संख्या का करीब 54 प्रतिशत है। कई स्थानों पर महिला प्रतिनिधि के स्थान पर पति या घर का कोई अन्य पुरुष पंचायतों के काम करा रहा है।
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पंचायत सचिव विनोद फोनिया के मुताबिक इनके खिलाफ धोखाघड़ी समेत विभिन्न धाराओं में कार्यवाही की जा सकती है। वहीं, इनका सहयोग करने वाले सरकारी कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही से लेकर एडवर्स एंट्री तक की कार्यवाही की हो सकती है।

आई कार्ड का प्रयोग रहा सफल
प्रधानपतियों का बढ़ता दखल रोकने के लिए प्रदेश में पंचायत प्रतिनिधियों को आई कार्ड जारी करने का प्रयोग भी किया गया।

इस प्रयोग का नतीजा सकारात्मक रहा और गैरसैंण में किए गए प्रयोग में यह सामने आया कि बैठकों में पंचायत प्रतिनिधियों की उपस्थिति बढ़ गई। अब यह भी कहा जा रहा है कि प्रदेश के अन्य स्थानों में भी यह प्रयोग किया जाएगा।
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लोक सूचना अधिकारी हैं प्रधान
देश में उत्तराखंड एक मात्र ऐसा राज्य हैं जहां जनप्रतिनिधियों को लोक सूचना अधिकारी का दर्जा दिया गया है।

प्रदेश में प्रधान ग्राम पंचायत के लिए लोक सूचना अधिकारी घोषित हैं और प्रधानों की सहायता के लिए ग्राम विकास अधिकारियों को सहायक लोक सूचना अधिकारी घोषित किया गया है। खुद राज्य सूचना आयोग कई बार शासन को कह चुका है कि प्रधानों से यह दायित्व हटाया जाए।
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