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उत्तराखंड: आर्थिक संकट टला पर अभी बरकरार है बड़ा संकट

Fri, 22 Jul 2016 08:43 AM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
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हरीश रावत - फोटो : पीटीआई
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उत्तराखंड सरकार विपक्ष की गैरमौजूदगी में वित्त विनियोग विधेयक पास कराकर राहत महसूस कर रही है, लेकिन 18 मार्च को सदन में रखे गए विनियोग बिल से पैदा हुआ संवैधानिक संकट अब भी खड़ा है।
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बिल पास करा सीएम हरीश रावत 31 जुलाई से पैदा होने वाले आर्थिक संकट से पार पा गए हैं, लेकिन राजनीतिक संकट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही स्थिति साफ करेगा। भाजपा ने गुरुवार को सीएम और विधानसभा अध्यक्ष के पुराने मनी बिल को पास करने के दिए हलफनामों का हवाला देकर विशेष सत्र में बिल पास करवाने को असंवैधानिक करार दिया।

सीएम हरीश रावत की सरकार के लिए वित्त विनियोग विधेयक संकट लेकर आया था। सदन में विनियोग विधेयक पर मतदान की मांग के बाद खड़ा हुआ संवैधानिक संकट अब भी सुलझा नहीं है। पुराना बिल राजभवन ने राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राष्ट्रपति को भेज दिया, जिसपर अभी तक स्वीकृति नहीं मिली।
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पहला बिल पास होने का हलफनामा दे चुके हैं सीएम रावत

हरीश रावत - फोटो : पीटीआई
उलटा केंद्र ने 13 हजार करोड़ का लेखानुदान पास कर अपनी स्थिति बिल को लेकर एक तरह से स्पष्ट की थी कि मनी बिल पास नहीं है। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका विचाराधीन है। अब सरकार ने गुरुवार को विधानसभा में नये सिरे से मनी बिल लाकर 31 जुलाई से गहराने वाले आर्थिक संकट से तो निजात पा ली है, लेकिन पुराना बिल संवैधानिक संकट पर स्थिति साफ करेगा।

सीएम पुराने बिल को भी पास मानते हैं जिसका हलफनामा कोर्ट में दिया है। इसी पर भाजपा लगातार सवाल उठा रही है कि जब बिल पास है तो यह नया बिल क्यों लेकर आए हैं। हालांकि इन सियासी दावों की हकीकत कोर्ट के फैसले से साफ होगी। अरुणाचल प्रदेश में संवैधानिक संकट पर आए फैसले के बाद 18 मार्च को बागी हुए विधायकों के हौसले बढ़े हैं। बर्खास्त विधायकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल ताजा याचिका स्वीकृत होने से दिक्कतें सरकार की ही बढ़ती दिख रही हैं।
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