यह होती है बाई-आर्टिकुलेटेड बसें
यह बैटरी से संचालित होती हैं। इसमें दो कोच (बसें) एक साथ जुड़ी होती हैं। इसमें फ्लैश चार्जिंग यानी तेजी से चार्ज होने वाली तकनीक होती है। शहर में इसकी गति 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी। यह सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल होगी। तीन देशों में इस तरह के सिस्टम का संचालन हो रहा है। हाल ही में लेटिन अमेरिका में भी इस तकनीक का परीक्षण किया गया है।
दो कॉरिडोर में 40 फीसदी आबादी होगी शामिल
बाई-आर्टिकुलेटेड बसों के रूट के दो कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इनसे सीधे तौर पर 42 वार्डों की 40 फीसदी आबादी को कवर किया जा सकता है। इसके बाद विक्रम, मैजिक और अन्य प्राइवेट रैपिट ट्रांजिस्ट सिस्टम से जोड़कर इसके माध्यम से 75 फीसदी आबादी को सेवाएं दी जा सकती हैं।
ये हैं प्रस्तावित कॉरिडोर
पहले चरण के कॉरिडोर :
कॉरिडोर एक- उत्तर से दक्षिण-आईएसबीटी से गांधी पार्क
कुल दूरी 8.523 किलोमीटर, स्टेशनों की संख्या-10
कॉरिडोर दो- पूर्व से पश्चिम-एफआरआई से रायपुर
कुल दूरी-13.901 किलोमीटर, कुल स्टेशन 15 किलोमीटर
दूसरे चरण के कॉरिडोर
रूट-दूरी और स्टेशन
रेलवे स्टेशन से पंडितवाड़ी- 4.65 किलोमीटर- 06
गांधी पार्क से आईटीपार्क- 6.2 किलोमीटर- 07क्लेमेंटटाउन से बल्लीवाला चौक-7.77 किलोमीटर-08
पहले चरण के कॉरिडोर फेस-2
कॉरिडोर 01 : गांधी पार्क से मैक्स अस्पताल तक- 6.8 किलोमीटर-स्टेशन 07
कॉरिडोर 02 : एफआरआई से प्रेमनगर-3.3 किलोमीटर (एक किलोमीटर भूमिगत)- 03
कॉरिडोर 03 : रिस्पना से विंडलास रिवर वैली- 6.5 किलोमीटर-स्टेशन 05
दूसरे चरण फेस-2
सुभाष नगर/चंद्रबनी से आईएसबीटी से रिस्पना-7.0 किमी-स्टेशन 04
सेवला कलां से हर्बर्टपुर-47 किमी-स्टेशन 24
पथरी बाग चौक से कारगी चौक से केदारपुर-04किमी-स्टेशन05
अजबपुर खुर्द से दून विवि-2.5किमी-स्टेशन 03
चंद्रबनी चौक से वाइल्ड लाइफ संस्थान-1.5 किमी-स्टेशन 02
देहरादून में मेट्रो से सस्ती मगर रोपवे से महंगी होगी नई प्रणाली
बाई-आर्टिकुलेटेड बस सिस्टम इलेक्ट्रिक रैपिड ट्रांजिट (ई-आरटी) प्रणाली के तहत आता है। यह प्रणाली मेट्रो से सस्ती होगी लेकिन रोपवे से लागत अधिक होगी। शासन के सामने प्रस्तुत करने को तैयार की गई रिपोर्ट में इसके प्रति किलोमीटर खर्च का विवरण नहीं है मगर इसकी संभावना जताई गई है। इसके खर्च का आकलन नियो मेट्रो से भी अधिक लगाया गया है। यह पूरी तरह इलीवेटेड कॉरिडोर पर चलेगी। इसमें आधुनिक स्टेशन, फ्लैश चार्जिंग प्रणाली और हाई कैपेसिटी इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी। कंपनी के विशेषज्ञों ने इसके रखरखाव के खर्च को मेट्रो और नियो मेट्रो दोनों से कम रहने की संभावना जताई है।
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ये हैं पहले की प्रणालियों की डीपीआर
मेट्रो लाइट-(2019 डीपीआर) : 91 करोड़ रुपये/किमी (देहरादून कॉरिडोर के लिए 110 करोड़ रुपये/किमी)
रोपवे (2020 डीपीआर): 103 करोड़ रुपये /किमी (2021 स्तर) और 126 करोड़ रुपये /किमी (2025 स्तर)
मेट्रो नियो:(अनुमानित 40–50 करोड़/किमी, नासिक के डीपीआर के आधार पर)