बागियों के सहारे अपना कुनबा मजबूत करने में जुटी भाजपा के खिलाफ कांग्रेस पलटवार की तैयारी कर चुकी है। बेनामी भूमि, सरकारी धन के दुरुपयोग, आपदा पुनर्वास में घोटाले सहित भाई भतीजावाद के जिन आरोपों पर भाजपा अब तक कांग्रेस को घेरती रही है, अब अपनी साख बचाने के लिए बागियों का डिफेंस करना पार्टी की मजबूरी होगी।
बगावत का हिसाब चुकता करने के लिए कांग्रेस हरक सिंह रावत और विजय बहुगुणा को मुख्य टारगेट के तौर पर लेगी। पूर्व मंत्री अमृता रावत के बहाने सतपाल महाराज को भी घेरने की तैयारी में कांग्रेस है। दूसरे बागियों की सियासी कुंडली को भी खंगाला जा रहा है।
सीएम हरीश रावत भले बदले की भावना से काम करने से इंकार कर रहे हैं, लेकिन बेनामी भूमि के मामलों की जांच का इरादा भी जाहिर कर दिया है। आने वाले दिनों में आरोप प्रत्यारोप की राजनीति एक कदम और आगे बढ़ेगी। बागी विधायकों के खिलाफ भाजपा की ओर से पूर्व में लगाए गए आरोपों पर कांग्रेस सरकार जांच बैठाकर एक तीर से कई निशाने साधेगी। सीबीआई जांच का जवाब कांग्रेस बागियों के खिलाफ कई जांच बैठा कर दे सकती है।
सरकार का मुख्य टारगेट हैं हरक
कांग्रेस के बागी जो भाजपा में आ गए।
- फोटो : फाइल फोटो
बगावत के बाद से हरक सरकार के निशाने पर हैं। कई बेनामी संपत्ति और एक मेडिकल कालेज के निर्माण के आरोप उनपर लगते हैं। इसके अलावा बतौर मंत्री हरक के अधीन आने वाले विभागों को भी खंगाला जा रहा है।
अपने विधानसभा क्षेत्र में कुछ विभागों उपनल से दो करोड़ और मंडी परिषद से दो करोड़ रुपये हरक ने अपने विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए दिया है। यह पैसा न केवल वापस लेने बल्कि उसमें जांच तक बैठाने की तैयारी है। कई विभागों में चेहतों को तैनात करने जैसे मामले भी बतौर मंत्री हरक पर भाजपा लगाती रही है, जिससे अब कांग्रेस उठाएगी।
दूसरा टारगेट बहुगुणा और करीबी
बागी हरक सिंह के बाद पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा कांग्रेस के निशाने पर रहेंगे। टिहरी विस्थापितों को आमबाग में पुनर्वास के लिए दी भूमि में भाजपा जिस घोटाले का आरोप लगाती रही है उसे अब कांग्रेस जांच बैठा कर बहुगुणा ही नहीं बल्कि सुबोध उनियाल को भी घेर सकती है। बहुगुणा के कार्यकाल में आपदा पुनर्निर्माण में कथित अनियमितताओं की बात को कांग्रेस सच साबित करने की कोशिश करेगी।
अमृता का सब्सिडी प्रकरण भी आ सकता है सामने
अमृता रावत
- फोटो : फाइल फोटो
पूर्व मंत्री अमृता रावत पर खुद उद्यान विभाग की मंत्री रहते पॉलीहाउस में चेहतों को सब्सिडी देने का आरोप है। बतौर नेताप्रतिपक्ष अजय भट्ट ने इस मामले पर विधानसभा में पुरजोर तरीके से उठाकर भाजपा ने बर्खास्तगी तक की मांग की थी। मामला कई दिन तक सुर्खियों में रहा, लेकिन कुछ साबित नहीं हुआ। अब कांग्रेस इसे मुद्दे को सियासी बनाकर उछालेगी और खिलाफत करने वाली भाजपा को पैरवी करनी होगी।
चैंपियन के हैं कई विवाद
कांग्रेस के पास भले कुंवर प्रणव चैंपियन के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित कोई बड़ा आरोप नहीं है, लेकिन उनके व्यवहार से जुड़े विवाद पर भाजपा को डिफेंस में रहना पड़ेगा। गोली कांड से लेकर कुंवर के कई वीडियो क्लिप वायरल होते रहे हैं, जिसपर चुटकी लेने वाली भाजपा को अब उन्हें शामिल करने से दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी।
बाकी भी हैं निशाने पर
पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, मंत्री हरक सिंह, सुबोध उनियाल, मंत्री अमृता रावत और कुंवर प्रणव के अलावा शैलारानी रावत, प्रदीप बत्रा, शैलेंद्र मोहन सिंघल, उमेश शर्मा काऊ के खिलाफ भी मामले खंगाले जाएंगे। काऊ को भूमि संबंधित मामलों पर घेरा जा सकता है। शैलारानी रावत पर एक व्यापारी नेता को आत्महत्या के लिए उकसाने का एक पुराना मामला लंबित है। इन मामलों को भी कांग्रेस चुनाव में बागियों के बहाने भाजपा को घेरेगी।