उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत के निधन के बाद खाली हुई पिथौरागढ़ सीट के उपचुनाव में पूर्व विधायक मयूख महर ही कांग्रेस की सबसे बड़ी उम्मीद होंगे। हालांकि अन्य नेताओं ने भी दावेदारी जतानी शुरू कर दी है। मगर दो बार के पूर्व विधायक मयूख महर का प्रोफाइल सब पर भारी है। पार्टी जल्द ही पिथौरागढ़ में लोकसभा चुनाव की समीक्षा के बहाने उपचुनाव की तैयारी भी शुरू करने जा रही है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह और प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह जल्द ही वहां जाकर कार्यकर्ताओं से बात करेंगे।
उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद पिथौरागढ़ सीट पर प्रकाश पंत और मयूख महर की तीन बार टक्कर हुई। इनमें से एक बार महर, तो दो बार प्रकाश पंत चुनाव जीते। मगर हर बार चुनाव कांटे का रहा। वर्ष 2002 में पहली बार दोनों आमने-सामने हुए और प्रकाश पंत जीत गए। वर्ष 2007 में महर ने पिथौरागढ़ में पंत का मुकाबला करने से बेहतर बगल की कनालीछीना सीट पर भाग्य आजमाना ज्यादा सही समझा।
इस चुनाव में उन्होंने यूकेडी के दिग्गज काशी सिंह ऐरी को हराकर विधानसभा में प्रवेश किया। वर्ष 2012 में पंत और महर एक बार फिर पिथौरागढ़ सीट पर मुकाबले में आए और इस चुनाव में महर ने पंत को हरा दिया। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पंत ने महर को हराकर बदला चुकता कर लिया। थराली उपचुनाव में भी कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव लड़ चुके प्रो.जीतराम को मौका दिया था। सूत्रों के अनुसार, 2017 का चुनाव दमदारी से लड़ने वाले उस वक्त के पार्टी प्रत्याशी होने के कारण मयूख महर को लेकर कोई संशय ही नहीं है। हालांकि पार्टी के मुख्य प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी और जगत सिंह खाती हमेशा की तरह इस बार भी इस सीट पर टिकट के दावेदार हैं।
पिथौरागढ़ उपचुनाव हमारी पार्टी पूरी दमदारी से लडे़गी। ठीक उसी तरह जैसे थराली उपचुनाव लड़ा गया था। जल्द ही हम पिथौरागढ़ में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने जा रहे हैं। इस दौरान तमाम बातों को लेकर समीक्षा की जाएगी।
-अनुग्रह नारायण सिंह, प्रभारी, उत्तराखंड कांग्रेस