उत्तराखंड में कांग्रेस उम्मीदवारों के रंग होली के बाद ही दिखेंगे। इसका कारण यह है कि चुनावी होली में जहां दूसरे दलों के प्रत्याशी कूदने को तैयार हैं, वहीं कांग्रेसी दिग्गज चुनाव लड़ने में पीछे हट रहे हैं।
पूर्व सीएम विजय बहुगुणा ने तो चुनाव लड़ने से पहले ही इंकार कर चुके हैं। अब सांसद सतपाल महाराज ने भी चुनाव न लड़ने की बात कही है।
यही नहीं महाराज के तीखे बयान ने मामले को और उलझा दिया है। ऐसे में बृहस्पतिवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई चुनाव समिति की बैठक में उत्तराखंड पर चर्चा तो हुई लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका।
महाराज की पिचकारी उगल रही आग
सतपाल महाराज की पिचकारी से आजकल रंग की जगह राजनीतिक आग निकल रही है। महाराज ने बृहस्पतिवार को मीडिया में लोकसभा चुनाव न लड़ने की बात कही है। हालांकि यह भी कह रहे हैं कि चुनाव लड़ाने या न लड़ाने का फैसला पार्टी को करना है।
रावत पर साधा निशाना
उन्होंने मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर इशारा करते हुए कहा कि जो लोग दिल्ली में आलाकमान से यह कहकर आए हैं कि हरिद्वार, नैनीताल और अल्मोड़ा की सीट वह जिताकर देंगे। ऐसे में पौड़ी और टिहरी गढ़वाल की हार-जीत किसकी होगी।
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पार्टी के नेता पहले बैठकर यह तय करें कि कौन किसको जिता रहा है। पहाड़ की दो सीटें अभी से हारी हुई बताई जा रही है।
विजय बहुगुणा ने भी चुनाव से खींचा हाथ
सतपाल महाराज के चुनाव न लड़ने की घोषणा पर प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य का कहना है कि अभी उनसे बात नहीं हुई है।
दूसरी ओर दिल्ली की बैठक में एक बार फिर संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हुई।
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पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भी चुनाव न लड़ने की घोषणा की है। हालांकि बहुगुणा भी इन दिनों दिल्ली में हैं। आलाकमान की ओर से टिहरी से उन्हें ही चुनाव लड़ाने के संकेत दिए जा रहे हैं।
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वर्तमान सांसदों में नैनीताल से दो बार जीते केसी बाबा और अल्मोड़ा से प्रदीप टम्टा के अलावा कुछ नाम जरूर सामने आए हैं लेकिन मुख्यमंत्री हरीश रावत परिवर्तन के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं।
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हरिद्वार सीट पर हरीश रावत के परिवार का ही कोई सदस्य चुनाव लड़ सकता है। इस संबंध में अब होली के बाद होने वाली बैठक में फैसला लिया जाएगा।