उत्तराखंड में बीता साल प्रदेश कांग्रेस के लिए मुसीबतों भरा और नेताओं को भारी पड़ा।
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प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य का पूरा कार्यकाल बेहतर मान सकते हैं लेकिन बीते साल स्थानीय निकायों में पार्टी की हार, अनुशासनहीनता, गुटबाजी और साल के अंत में जिस तरह उन्होंने अपनी विदाई खुद तय की उसने पार्टी की फजीहत कराई है।
अंबिका सोनी को प्रदेश का प्रभारी बनाया
गिरती साख बचाने के लिए ही कांग्रेस आलाकमान ने अंबिका सोनी को प्रदेश का प्रभारी बनाया। बीते साल से पहले यशपाल आर्य की पहचान चुनाव जिताऊ अध्यक्ष के तौर पर थी। मार्च-अप्रैल में स्थानीय निकाय चुनाव में पार्टी को भारी नुकसान हुआ।
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सरकार मानकार चल रही थी प्रदेश में एक से छह नगर निगम बनाने पर वहां कांग्रेस की सत्ता होगी। जबकि पांचों नए नगर निगम काशीपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी, रुढ़की और हरिद्वार में पार्टी टिकट बंटवारे और आपसी खींचतान में एक भी सीट निगम नहीं जीत सकी।
देहरादून में पार्टी को पूरी संभावना थी लेकिन यहां स्थानीय स्तर पर गुटबाजी इस कदर हावी थी कि पार्टी के बड़े नेता खुलेआम मेयर उम्मीदवार से पुरानी खुन्नस निकालने में जुटे थे। पार्टी प्रवक्ता वैसे तो किसी संगठन का आईना होता है लेकिन प्रदेश के दो प्रवक्ता विवादों में घिरे रहे।
अनुशासनहीनता कर बैठे कांग्रेस प्रवक्ता
कांग्रेस प्रवक्ता धीरेन्द्र प्रताप जो अनुशासन समिति के सचिव भी हैं अनुशासनहीनता कर बैठे। धीरेन्द्र प्रताप उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी केबैनर तले दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित धरने में जा पहुंचे।
इस पर पार्टी के कुछ बड़े नेताओं ने आपत्ति जताई और उन्हें पार्टी से निकालने की बात तक कह डाली। जैसे तैसे मामला शांत हुआ। जबकि दूसरे प्रवक्ता सुरेन्द्र आर्य को पद से हाथ धोला पड़ा। आर्य पर भी पार्टी विरोधी बयानबाजी का आरोप लगा था।
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कांग्रेस नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष को बेहतर तालमेल और काम के चलते ही रिपीट किया था। लेकिन एक व्यक्ति एक पद केसिद्वांत में आर्य ने मंत्री पद बचाए रखने केलिए नवंबर में इस्तीफा सौंप दिया।
आर्य का इस्तीफा एक महीने बाद भी मंजूर नहीं हुआ है लेकिन आर्य के इस्तीफा देने और प्रदेश सरकार में नेतृत्व परिवर्तन ने पार्टी में कई गुट और समीकरण पैदा कर दिए हैं। कांग्रेस आलाकमान इसीलिए अभी तक प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर अंतिम फैसला नहीं ले सका है।
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प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी संजय कपूर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और नब्ज टटोलने के लिए निकले लेकिन देहरादून नगर इकाई की बैठक में जो हुआ उससे पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़नी तय है। उम्मीद है नए साल में कांग्रेस नए अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं के नए जोश के साथ लोकसभा चुनाव में उतरेगी।