नगर निगम सभागार में खाद्य सुरक्षा समारोह के दौरान मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पीठ फेरते ही मंच पर ‘छीछालेदर’ मच गई।
नेता और उनके समर्थक अपने सिफारिशी लोगों के राशनकार्ड के बंडल छीनने में लग गए। इस चक्कर में बहुत सी महिलाओं को राशनकार्ड ही नहीं मिल पाए।
नेताओं की छीन-झपट देखकर एडीएम (वित्त) झरना कमठान और डीएसओ श्याम आर्य मंच पर एक कोने खड़े रहे।
बंडलों पर झपटे नेता
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और उनकी कैबिनेट के मंत्रियों ने अपने हाथों से 21 लाभार्थियों को राशन कार्ड और अनाज के पैकेट बांटे। इसके बाद मुख्यमंत्री चले गए और मंत्रियों ने सभागार के बाहर आकर मीडिया को बाइट देनी शुरु कर दी।
अंदर मंच पर विधायक, पार्षद और कांग्रेस के नेता राशन कार्ड के बंडलों पर झपट पड़े। नेताओं के लाभार्थी समर्थकों की भीड़ उनके इर्द-गिर्द जमा हो गई। कुरसियों पर बैठे लोग भी मंच पर चढ़ आए।
सब फ्राड हो रहा है
विधायक राजकुमार बार-बार चिल्लाते रहे ‘नेगी जी हमारा 20 राशन कार्ड का बंडल कहां चला गया?’ विधायक उमेश शर्मा के समर्थक नेता अपने लोगों के राशन कार्ड ढूंढते रहे। बीच में पार्षद अपने समर्थकों के राशन कार्डों को ढूंढने में लग गए।
मंच पर भीड़ में धक्कामुक्की मची रही। इसी बीच एक महिला नेता हल्ला मचाती रही कि ‘सब फ्राड हो रहा है’। उसकी दो समर्थकों ने अनाज का एक-एक पैकेट उठाया और चलती बनीं। राशन कार्ड ढूंढने के चक्कर में पता ही नहीं चला कि अनाज के बाकी बचे पैकेट कौन ले गया।
कार-बंगला वालों ने बनवा लिए बीपीएल-मेयर
नगर निगम सभागार में खाद्य सुरक्षा योजना के संबंध में मंत्रियों के सब्ज बाग दिखाने के बाद मेयर विनोद चमोली ने कड़वी हकीकत उकेर दी।
बोले कि देहरादून में कार-बंगले वाले बीपीएल कार्ड लेकर घूमते हैं। ये लोग किसी का हक मार रहे हैं। योजना की कड़ी समीक्षा हो ताकि गरीबों को उनका हक मिल सके।
योजना का क्रियान्वयन ही गलत
मेयर विनोद चमोली ने सलाह दी कि जब योजना का क्रियान्वयन सही तरीके से होगा, तभी बीपीएल, अन्त्योदय के लाभार्थियों को उनका हक मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि बहुत से हकदारों के बीपीएल कार्ड नहीं बन पाए।
जो बीपीएल गलत बन गए हैं, उन्हें एपीएल में तब्दील किया जाना चाहिए। योजना की निगरानी की जाए। बाद में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि योजना पर नजर रखने के लिए निगरानी समितियां बनेंगी।
कहां गई लाभार्थियों की सूची?
खाद्य सुरक्षा योजना के लाभार्थियों की सूची कार्यक्रम खत्म होते ही कहां चली गई, पता नहीं। इस सूची के लिए जिला सूचना अधिकारी समेत दूसरे अधिकारी भी डीएसओ दफ्तर से पूछते रहे।
नेताओं ने बनाया दबाव
डीएसओ श्याम आर्य लाभार्थियों की सूची शाम तक अधिकारियों को उपलब्ध नहीं करा पाए। सूत्रों का कहना है कि सूची फाइनल होने के बाद नेताओं ने दबाव बनाकर अपने लोगों के नाम चढ़वा लिए थे। इससे वे इसे दिखाने में घबरा रहे थे। इसमें लाभार्थियों की संख्या तय नामों से अधिक हो गई।
इसी वजह से सारे लोगों को अनाज भी नहीं मिल पाया। डीएसओ आर्य का कहना है कि खाद्य निरीक्षक जिसके पास सूची थी, वह इसे अल्मारी में रखकर चला गया है। थक गया होगा, इसलिए लंच के बाद दफ्तर नहीं आया।